श्रीलंका, बांग्लादेश, पाकिस्तान, म्यांमार और अब नेपाल, 4 सालों में 5 देशों में सियासी अस्थिरता, भारत के पड़ोसियों को कौन बना रहा निशाना?

By अभिनय आकाश | Sep 09, 2025

2021 में म्यांमार, 2022 में पाकिस्तान और श्रीलंका, 2024 में बांग्लादेश और अब नेपाल। पिछले कुछ वर्षों में भारत के पड़ोसी देशों ने एक के बाद एक आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल देखी है। इन वर्षों में भारत ने अपने पड़ोसी पहले कूटनीतिक दृष्टिकोण को बनाए रखा है, जिसमें मानवीय सहायता से लेकर विकास सहयोग, सीमा कूटनीति और प्रत्येक पड़ोसी के संदर्भ के आधार पर सतर्क जुड़ाव तक की भूमिकाएँ निभाई हैं। नेपाल के मौजूदा हालात के बीच भारत ने भी यही किया है। नेपाल में सोमवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें सुरक्षाकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों अन्य घायल हो गए। विरोध प्रदर्शन हिंसक हो जाने पर ओली ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने युवाओं की जान जाने पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्थिति पर कड़ी नज़र रख रहा है और भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने और नेपाल की अनावश्यक यात्रा से बचने का आग्रह किया। 

श्रीलंक में राजपक्षे परिवार के खिलाफ विरोध

2022 के आर्थिक संकट के बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षा देश छोड़कर भागे। 23 सितंबर 2024 में अनुरा कुमार दिसानायके राष्ट्रपति बने। अनुरा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और 5 पूर्व मंत्रियों को भष्ट्राचार के मामलों में जेल की सजा सुनाई गई। श्रीलंका की अर्थव्यवस्था अभी भी संकट में है। लोगों पर महंगाई, बेरोजगारी और गरीबी का बोझ बना हुआ है।

इसे भी पढ़ें: ओली का इस्तीफा स्वीकार, कौन हैं रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह, जिसे सत्ता सौंपने की मांग कर रहे नेपाल के Gen Z आंदोलनकारी

बांग्लादेश में छात्रों ने हसीना को सत्ता से बेदखल किया

अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हसीना सरकार के तख्तापलट एक महीने में नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख नियुक्त किया गया। 90 दिनों में चुनाव होना था, लेकिन वे पिछले 13 माह से पीएम बने हुए हैं। कई आंदोलनकारी छात्रों को अंतरिम सरकार में शामिल किया गया था। 8 प्रमुख छात्र नेताओं में से आधे से ज्यादा साइड लाइन होने के बाद सरकार छोड़ चुके हैं। सेना ही सत्ता चला रही है। बांग्लादेश को लेकर भारत की ओर से, प्रतिक्रिया सतर्कतापूर्ण रही। सरकार ने यात्रा परामर्श के माध्यम से अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी, तनाव कम करने के लिए बांग्लादेशी सैन्य नेताओं के साथ कूटनीतिक बातचीत की, और सीमित हस्तक्षेप का रुख अपनाते हुए शेख हसीना को शरण दी। हालाँकि पेट्रापोल जैसे व्यापार मार्ग प्रभावित हुए, लेकिन सुरक्षा के तहत आंशिक रूप से व्यापार फिर से शुरू होना उस नाज़ुक संतुलन को दर्शाता है जिसे दोनों देशों ने बनाए रखने की कोशिश की।

पाकिस्तान में क्या हुआ?

अप्रैल 2022 में इमरान खान की सत्ता से विदाई के बाद शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार बनी। लेकिन सरकार सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसीम मुनीर ही नियंत्रित कर रहे हैं। सरकार कई मोचों पर असंतोष से जूझ रही है। बलूचिस्तान और खैबर-पख्तूनख्वा में विद्रोहियों के हमले 70% बढ़ गए हैं। भारत की प्रतिक्रिया विवेकपूर्ण और संयमित थी: घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखते हुए, फिर भी पाकिस्तान की आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल में हस्तक्षेप न करने का निर्णय लिया गया।

इसे भी पढ़ें: Nepal Gen Z protest: काठमांडू की सड़क पर भागते रहे नेपाल के वित्त मंत्री, बरसते रहे लात-घूंसे, Video वायरल

म्यांमार में 2021 से सत्ता में सेना

फरवरी 2021 में म्यांमार की सेना ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया। स्टेट काउंसलर आंग सान सू की और राष्ट्रपति यू विन म्यिंट को हिरासत में ले लिया और नवंबर 2020 के आम चुनाव में कथित चुनावी धोखाधड़ी का हवाला देते हुए एक साल के लिए आपातकाल की घोषणा कर दी। देश भर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। जवाब में सैन्य शासन ने कर्फ्यू लगा दिया, सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया (जैसे, पाँच से ज़्यादा लोगों का समूह नहीं), और बल प्रयोग किया - जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों नागरिक मारे गए। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार अब तक 6,231 नागरिक मारे जा चुके हैं।

प्रमुख खबरें

महंगाई का डबल झटका: April Inflation Rate साल के शिखर पर, RBI ने भी दी बड़ी Warning

WPL 2025 की Star Shabnim Ismail की वापसी, T20 World Cup में South Africa के लिए फिर गरजेंगी

क्रिकेट में Rahul Dravid की नई पारी, European T20 League की Dublin फ्रेंचाइजी के बने मालिक

El Clásico का हाई ड्रामा, Barcelona स्टार Gavi और Vinicius के बीच हाथापाई की नौबत