जम्मू कश्मीर के राजनीतिक दलों ने डोमिसाइल कानून में संशोधन को ‘दिखावटी’ बताया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Apr 04, 2020

श्रीनगर/जम्मू। जम्मू कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों ने केंद्र शासित प्रदेश के लिए डोमिसाइल (अधिवास) कानून में संशोधन पर तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा कि यह महज ‘दिखावटी’ हैं। साथ ही कहा कि यह अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इसका फैसला करने का अधिकार जम्मू कश्मीर के लोगों के पास होना चाहिए कि कौन सा कानून उन्हें चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर लिखा, ‘‘जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए यह विचार करने का वक्त है कि कौन से कानून उनपर थोपे जा रहे हैं क्योंकि यह केंद्र की इच्छा से हो रहा है। सुबह आदेश जारी किया जाता है और शाम में उसमें बदलाव होता है। राज्य का दर्जा वापस करें और चुनाव करवाएं। ’’

उमर की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने एक बयान में कहा कि दिखावटी किस्म के बदलाव किए गए हैं और इसमें कोई संदेह नहीं है कि अधिवास कानून जम्मू कश्मीर की जनसांख्यिकी को बदल देगा और स्थानीय लोगों के नौकरी के अधिकार में सेंध लगेगी। केंद्र सरकार ने अपने दो दिन पुराने आदेश में बदलाव किया और जम्मू कश्मीर में सारी नौकरियों को केंद्र शासित क्षेत्र के मूल निवासियों के लिए आरक्षित कर दिया जो राज्य में कम से कम 15 साल रहे हैं।

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बुधवार को निवासियों के लिए नियम तय करते हुए सरकार ने केवल समूह चार तक के लिए नौकरियां आरक्षित की थी। हालांकि, सियासी दलों की तीखी प्रतिक्रिया के बाद आदेश में बदलाव किया गया है। पीडीपी ने संशोधनों को मामूली बदलाव बताते हुए कहा कि केंद्र को जम्मू कश्मीर की जनसांख्यिकी पर ‘प्रहार’ के संबंध में आशंकाओं का समाधान करना चाहिए। पीडीपी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘‘हमारे युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना महत्वपूर्ण है लेकिन भारत सरकार को जम्मू कश्मीर की जनसांख्यिकी पर हमला के संबंध में आशंकाओं का समाधान करना चाहिए। मामूली फेरबदल से एक दरवाजा खुला रख दिया गया है...।’’

पीडीपी के प्रवक्ता और पूर्व विधायक फिरदौस टाक ने कहा कि 1.2 करोड़ की आबादी वाले जम्मू कश्मीर के लिए जल्दबाजी में ऐसा कानून बनाया गया जिसे केंद्र सरकार को 72 घंटे में ही बदलना पड़ गया। उन्होंने कहा कि डोमिसाइल कानून संशोधित रूप में भी खतरनाक है और यह सत्ता के गलियारे में बैठे लोगों के इरादों को जाहिर करता है। हालांकि, जम्मू कश्मीर कांग्रेस के उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री जी एम सरूरी ने सरकार से राज्य का दर्जा बहाल करने की स्थानीय निवासियों की मांग को भी पूरा करने की अपील की।

सरूरी ने संशोधन का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘ जाति, रंग, पंथ और क्षेत्र से ऊपर उठकर हरेक की आपत्ति ने भाजपा सरकार को 24 घंटे के अंदर ही आदेश को संशेाधित करने के लिए बाध्य कर दिया। सरूरी के संशोधनों का स्वागत करने के कुछ घंटे बाद जम्मू कश्मीर कांग्रेस इकाई के अध्यक्ष जी ए मीर ने कहा , ‘‘जम्मू कश्मीर के युवाओं को एक बार फिर बेवकूफ बनाया गया है क्योंकि उन्हें बताया गया है कि जम्मू कश्मीर में सारी नौकरियां उनके लिए हैं। जब हकीकत से उनका सामना होगा और सच जानेंगे तो पता चलेगा कि उनके साथ धोखा हुआ है तो वे भाजपा और उन दलों से सवाल करेंगे जो युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं और बदलाव का श्रेय ले रहे हैं।’’

हाल में गठित जम्मू कश्मीर अपनी पार्टी (जेकेएपी) के अध्यक्ष सैयद मोहम्मद अल्ताफ बुखारी ने केंद्र के कदम का स्वागत किया लेकिन कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों की आकांक्षा के मुताबिक बाकी खामियां दूर किए जाने तक पार्टी लगातार प्रयास करती रहेगी। जम्मू कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता जुनैद अजीम मट्टू ने कहा कि संशोधन के बावजूद डोमिसाइल आदेश अभी भी आंकाक्षाओं के अनुरूप नहीं है। माकपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने कहा कि कानून को लेकर जम्मू कश्मीर में फैले आक्रोश ने केंद्र सरकार को इसमें बदलाव करने के लिए बाध्य कर दिया।

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