By अंकित सिंह | Jul 29, 2026
बुधवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर 'एंटी-पेपर लीक बिल' पर बहस के दौरान असहमति की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया। उनके ये बयान 'एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल' पर चर्चा के दौरान सदन में हुई तीखी बहस के बाद आए। गांधी ने दावा किया कि विपक्ष की आवाज़ को दबाया जा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष को पूरी छूट दी जा रही है। इससे मॉनसून सत्र के दौरान चल रही राजनीतिक तनातनी और बढ़ गई है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्होंने छात्रों को छर्रों (पेलेट) से घायल देखा और पुलिस को छात्रों पर कील लगे डंडों से लाठीचार्ज करते हुए देखा। राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के कंट्रोल में है और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए इस्तेमाल की गई फोर्स भी मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आती है; उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर कार्रवाई का आदेश शाह ने ही दिया था।
उन्होंने आगे कहा कि अगर गृह मंत्री को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेरहमी से बल प्रयोग किए जाने की जानकारी नहीं थी तो वह अक्षम हैं, और अगर उन्हें जानकारी थी, तो वह दोषी हैं। राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अपना हमला तेज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शाह को पद से हटा देना चाहिए और घटना की स्वतंत्र जांच का आदेश देना चाहिए।
गांधी ने कहा कि मुझे बोलने नहीं दिया गया। कई बार राजनाथ सिंह और किरेन रिजिजू को बोलने का मौका दिया गया। मुझे भरोसा दिलाया गया कि अगर मैं माफ़ी मांग लूं, तो मुझे अपनी बात जारी रखने दी जाएगी। मैं बीजेपी या आरएसएस से कभी माफ़ी नहीं मांगूंगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों को उठाना उनका अधिकार है और कहा कि कथित NEET पेपर लीक के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ पुलिस की कार्रवाई देश के सामने सबसे अहम मुद्दा है।
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