डिजिटल कक्षाओं का ऑनलाइन देखा हाल, बाढ़ और बारिश से गाँव-शहर बेहाल...क्या यही न्यू इंडिया है?

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 22, 2020

भारत में कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा प्रदान की जा रही है ताकि बच्चों का कोर्स पूरा कराया जा सके लेकिन शहरों और गाँवों के बीच खाई इतनी ज्यादा है कि गांव तो छोड़ दीजिये शहरों में भी अधिकांश बच्चों के पास स्मार्ट फोन या लैपटॉप नहीं है। गाँवों में इंटरनेट की समस्या है तो डेटा पैक रिचार्ज कराने का एक नया खर्च बढ़ जाने से अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं कई जगह से तो ऐसे भी समाचार आ रहे हैं कि चूँकि अभिभावक बच्चों की स्कूल की फीस देने में असमर्थ दिखे तो उनके बच्चों को ऑनलाइन कक्षा में बैठने ही नहीं दिया जा रहा है। हालाँकि जब-जब ऐसे मामले प्रशासन के संज्ञान में लाये जाते हैं तो कार्रवाई होती है। इसके अलावा सरकार ने कम्युनिटी लर्निंग की व्यवस्था की है और शिक्षा के लिए कुछ टीवी चैनल भी शुरू किये गये हैं जोकि विभिन्न भाषाओं में पढ़ाई करा रहे हैं साथ ही रेडियो के माध्यम से भी पढ़ाई करवाई जा रही है लेकिन यह भी दिक्कत है कि पिछड़े इलाकों में कई घरों में अब भी टीवी नहीं होते तो ऐसे में उनके बच्चों की शिक्षा का क्या होगा?

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दूसरी ओर भारतीय रेलवे की ओर से नये कीर्तिमान रचे जाने का दौर जारी है। रेलवे अपनी पुख्ता तैयारियों की बदौलत देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देना जारी रखे हुए है। रेलवे की फ्रेट कॉरिडोर योजना और घर से घर तक सामान पहुँचाने की योजना आने वाले दिनों में रेलवे की तसवीर बदल कर रख देगी। इसके अलावा बुलेट ट्रेन परियोजना पर भी काम जारी है। रेलवे ने जिस तरह कोरोना काल में लोगों की सेवा का कार्य जारी रखा हुआ है वह सराहनीय है।

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