By Abhinay akash | Oct 27, 2026
धर्मस्थल में 2012 के बलात्कार और हत्या के मामले की दोबारा जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने 15 से अधिक पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को तलब किया है। इन लोगों ने मामले की जांच के अलग-अलग चरणों में काम किया था—जिसमें बेल्थंगडी पुलिस की शुरुआती जांच से लेकर, बाद में क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) और सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा की गई जांच शामिल है। जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया धिकारियों को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 160 के तहत नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें उन्हें शुक्रवार को पूछताछ के लिए पेश होने का निर्देश दिया गया है। यह पूछताछ SIT द्वारा पिछले 14 वर्षों में की गई जांचों की समीक्षा का हिस्सा है; इन जांचों में से किसी में भी कोई दोषसिद्धि (सजा) नहीं हुई। टीम यह देख रही है कि अलग-अलग एजेंसियों ने इस मामले को कैसे संभाला और अपनी जांच के दौरान क्या सबूत जुटाए।
टीम ने अक्टूबर में मौजूदा केस रिकॉर्ड की जांच करके और CID तथा CBI से दस्तावेज, सबूत और जांच फाइलें मांगकर अपनी जांच शुरू की। जगलासर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि मंगलुरु सेंट्रल क्राइम ब्रांच के सहायक पुलिस आयुक्त मनोज कुमार नाइक उनकी सहायता कर रहे हैं। कई एजेंसियों द्वारा जांच किए जाने के बावजूद यह मामला अनसुलझा ही रहा। इस अपराध के सिलसिले में आरोपी बनाए गए एकमात्र व्यक्ति, संतोष राव को 16 जून 2023 को एक ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। उजिरे के SDM कॉलेज की 17 वर्षीय छात्रा 9 अक्टूबर 2012 को कॉलेज से घर लौटते समय लापता हो गई थी। अगले दिन धर्मस्थल में नेत्रावती नदी के पास एक जंगली इलाके में उसका शव मिला। पोस्टमार्टम से पुष्टि हुई कि हत्या से पहले उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया था। इस मामले की शुरुआती जांच बेल्थंगडी पुलिस ने की थी, जिसके बाद इसे CID और फिर CBI को सौंप दिया गया। इनमें से किसी भी जांच से कोई दोषी साबित नहीं हो सका। SIT को निर्देश दिया गया है कि वह मामले की नए सिरे से जांच करे, न कि केवल पिछली जांच एजेंसियों के निष्कर्षों को ही दोबारा देखे।