By संतोष उत्सुक | Oct 31, 2020
किसी भी काम को करने के अनगिनत तरीके सुझाए जा सकते हैं, काम निबटाने के तो सौ से ज़्यादा नुक्ते भी हो सकते हैं। काम करने के सही और गलत रास्ते भी माने जाते रहे हैं। काम अच्छा है या बुरा यह सोच से जुड़ा अलग दिलचस्प विषय है। ज़िम्मेदारी बड़ी चीज़ है, राजनीतिक कुर्ता पाजामा पहनने वालों के दिन रात, हमेशा ज़िम्मेदारी से लबरेज़ रहते हैं। अक्सर सफ़ेद पाजामा और ब्रेंडिड सफ़ेद जूते पहनने वाले समाजसेवी गर्व सहित बताते हैं कि उनका काम भी बहुत मेहनत मांगता है। उन्हें ऐसी ड्रैस के आधा दर्जन जोड़े रखने पड़ते हैं। राजनीतिक प्रचार का खाना बांटने के लिए अक्सर बहुत गंदे, बदबू मारते लोगों के बीच जाना पड़ता है, इतना कि वापिस आकर गाड़ी भी सुगंधित शावर से धुलवानी पड़ती है और खुद भी ज़्यादा खुशबूदार बॉडी वाश से नहाना पड़ता है। गमछा तो दशकों से नाक पर ही रहता है। सच्ची प्रार्थनाओं के बदले इतने झूठे आश्वासन देने पड़ते हैं कि जीभ भी इन्कार करने लगती है। पुराने जमाने में हमारे शहर के विधायक के पास जब जान पहचान का ख़ास वोटर काम के पहुंच ही जाता था तो झट से लैंडलाइन पर नंबर घुमाकर फोन का चोगा उठाकर कह देते थे, इनको भेज रहा हूँ देख लीजिएगा, अपने आदमी हैं। वास्तव में वे अपने परिवारवालों को सरकारी नौकरियां दिलाने में बहुत बहुत मेहनत करने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाते थे।
सफल राजनीतिज्ञ ने ज़िम्मेदारी के साथ बताया कि पिछले दस साल से यह मुद्दा संसद में कई बार उठा चुका हूं, पीएम से व्यक्तिगत रूप से मिलकर भी मुद्दों को रखा है, पीएम के पास और भी मुद्दे हैं, शायद थोड़ा समय और लग जाए। करत करत अभ्यास के सब ठीक हो जाता है। ज़िम्मेदारी निभाना भी एक ज़रूरी काम है।
- संतोष उत्सुक