कजाकिस्तान मे हिंसक प्रदर्शन रोकने के लिए रूस के नेतृत्व वाला गठबंधन भेजगा शांतिदूत

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 06, 2022

मास्को। रूस के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बृहस्पतिवार को कहा कि कजाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए मदद मांगने के बाद वहां शांति सेना भेजी जाएगी। कजाकिस्तान में प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं और प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लिया है तथा आगजनी में शामिल हैं। खबरों के अनुसार, कजाकिस्तान के सबसे बड़े शहर में प्रदर्शनकारियों ने बुधवार को राष्ट्रपति निवास और मेयर कार्यालय पर धावा बोल दिया और दोनों में आग लगा दी। मध्य एशियाई राष्ट्र में ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण प्रदर्शनों में तेजी आई है। पुलिस ने कथित तौर पर अल्माटी स्थित आवास से प्रदर्शनकारियों के भागने से पहले कुछ लोगों पर गोलियां चलाईं। हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हो चुकी है।

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कजाकिस्तान में समाचार वेबसाइटों तक पहुंच बना पाना मुश्किल हो गया और वैश्विक निगरानी संगठन नेटब्लॉक्स ने कहा कि देश व्यापक इंटरनेट ब्लैकआउट का अनुभव कर रहा है। रूसी समाचार एजेंसी तास ने बताया कि अल्माटी में बृहस्पतिवार तड़के इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई। वाहन ईंधन के रूप में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली एक प्रकार की तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की कीमतों के लगभग दोगुने होने के विराध में प्रदर्शन शुरू हुआ था। टोकायव ने दावा किया कि इस अशांति का नेतृत्व ‘‘आतंकवादी बैंड’’ कर रहे थे जिन्हें अन्य देशों से मदद मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि अल्माटी के हवाई अड्डे पर हमले में दंगाइयों ने पांच विमानों को जब्त कर लिया था, लेकिन उप महापौर ने बाद में कहा कि हवाई अड्डे को दंगाइयों से मुक्त करा लिया गया और वहां सामान्य रूप से कामकाज हो रहा है। कजाकिस्तान, दुनिया का नौवां सबसे बड़ा देश है। इसकी सीमाएं उत्तर में रूस और पूर्व में चीन से लगती हैं और इसके पास व्यापक तेल भंडार है जो इसे रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। तेल के भंडार और खनिज संपदा के बावजूद देश के कुछ हिस्सों में लोग खराब हालत में रहने को मजबूर हैं जिसके कारण लोगों में असंतोष है। वर्ष 1991 में सोवियत संघ से अलग होने के बाद कजाकिस्तान में एक ही पार्टी का शासन रहा है और इसकी वजह से भी लोगों में असंतोष है।

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