Still Alive में Samay Raina ने बयां किया Psychosis का दर्दनाक अनुभव, जानें इसके बारे में

By एकता | Apr 09, 2026

समय रैना ने अपने नए वीडियो Still Alive के साथ एक बार फिर जोरदार वापसी की है। ये वापसी ऐसे समय में आई है जब India's Got Latent विवाद को एक साल से ज्यादा हो चुका है। वीडियो में समय ने साफ तौर पर उन लोगों पर तंज कसा, जिनमें रणवीर अल्लाहबादिया भी शामिल हैं, जो उस समय लाइमलाइट लेने की कोशिश कर रहे थे। साथ ही, उन्होंने अपने पिता का भी जिक्र किया और बताया कि उनके सबसे मुश्किल समय में वही उनके साथ चट्टान की तरह खड़े रहे।

उन्होंने कहा कि उन्हें पहले भी एंग्जायटी अटैक होते रहे हैं, लेकिन इस बार हालत ज्यादा खराब हो गई। शो से पहले उन्हें कंपकंपी, तेज धड़कन, ज्यादा पसीना और सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानी होने लगी। ये सब कुछ चक्कर आने जैसा महसूस हो रहा था। थेरेपिस्ट ने उन्हें परफॉर्म न करने की सलाह दी थी, लेकिन फिर भी समय स्टेज पर गए और शो किया।

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साइकोसिस क्या होता है?

सीधी भाषा में समझें तो साइकोसिस एक ऐसी स्थिति होती है, जब इंसान कुछ समय के लिए असलियत और अपने दिमाग में चल रही बातों के बीच फर्क करना भूल जाता है। हालांकि, आम बातचीत में लोग इस शब्द का इस्तेमाल तब भी करते हैं जब मानसिक दबाव इतना ज्यादा हो जाए कि सोच को संभालना मुश्किल लगने लगे।

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ह्यूमर कैसे एक ढाल बन जाता है?

ऐसी मुश्किल हालत में, जैसा समय रैना ने झेला, ह्यूमर कई बार एक ढाल की तरह काम करता है। जब इंसान अंदर से बहुत दबाव में होता है, तो वो मजाक और कॉमेडी के जरिए उस दर्द को थोड़ा हल्का करने की कोशिश करता है। सामने से देखने पर लगता है कि वो बस मजाक कर रहा है, लेकिन असल में वो उसी के जरिए खुद को संभाल रहा होता है। समय ने भी अपने वीडियो में तंज और ह्यूमर का इस्तेमाल करके ना सिर्फ लोगों को जवाब दिया, बल्कि अपने उस मुश्किल दौर को भी थोड़ा आसान बनाने की कोशिश की। यही वजह है कि कई बार कॉमेडी सिर्फ हंसाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को टूटने से बचाने का तरीका भी बन जाती है।

साइकोसिस होने पर खुद को कैसे संभालें?

अगर किसी को साइकोसिस जैसी स्थिति महसूस हो रही है, तो सबसे पहले खुद को सुरक्षित और शांत रखने की कोशिश करें। ऐसे समय में अकेले रहने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति परिवार या दोस्त के साथ रहना ज्यादा मददगार होता है। गहरी सांस लेना, आसपास की चीजों पर ध्यान देना (जैसे क्या दिख रहा है, क्या सुनाई दे रहा है) दिमाग को थोड़ा स्थिर करने में मदद करता है। सबसे जरूरी बात, इसे नजरअंदाज न करें और जितनी जल्दी हो सके किसी डॉक्टर या थेरेपिस्ट से बात करें, क्योंकि सही मदद और इलाज से इस स्थिति को संभाला जा सकता है।

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