बारातियों का स्वागत तो... (व्यंग्य)

By डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त’ | May 31, 2021

तोहे मैं न जानूँ मोहे तू न जानें, फिर भी केसर के अल्फाजों से। 

यदि इन पंक्तियों को पढ़ने के बाद कहीं आप में देशभक्ति जागृत हो गयी हो, तो उसे सुला दीजिए। यह देशभक्ति की पंक्तियाँ नहीं प्रसिद्ध गुटखा विज्ञापन की पंक्तियाँ हैं। वैसे भी देश को अपने मुँह की पीक से केसरिया करने का जितना श्रेय गुटखा कंपनियों को जाता है, उतना तो देश के शहीदों को भी नहीं जाता। हमारे यहाँ तो हर फिल्म तंबाकू रूपी खलनायक की एंट्री से होती है। विश्वास न हो तो किसी भी फिल्म की शुरुआत में खाँसने वाले बंदे मुकेश हराने को देख लीजिए। वैसे तो अपने देश में ऐसे कई मुकेश हराने हैं जो तंबाकू के बिना जी नहीं सकते। इसलिए उनका आए दिन कैंसर का इलाज करने के लिए घर वाले हर दिन सोने की चूड़ियाँ बेचते हुए दिखायी देते हैं। न जाने  मुकेश के कैंसर का इलाज कौनसा डॉक्टर कर रहा है जो ठीक होने का नाम नहीं ले रहा है। लगता है उसके इलाज में देश का पूरा सोना लूट जाएगा। तंबाकू खाना सेहत के लिए हानिकारक होता है - इसे चेतावनी की जगह देश की राष्ट्र पंक्ति घोषित कर दी जाए तो अच्छा होता। वैसे भी सत्यमेव जयते कहने से देश का कौनसा भला हो रहा है। उससे तो अच्छा है तंबाकू खाना सेहत के लिए हानिकारक है, के बार-बार कहने से कम-से-कम कुछ लोगों का तो भला होगा।

इसे भी पढ़ें: रहोगे जो तुम कुटिया में, नहीं जाओगे लुटिया में (व्यंग्य)

तंबाकू की संतान है– गुटखा, खैनी और न जाने क्या-क्या। ये सब मिलकर अपने बाप का नाम रौशन कर रहे हैं। तंबाकू खाने से कैंसर होता है और यह बात हर आदमी जानता है। मौत को गले लगाने का साहस जितना भारतीयों में है उतना ही शायद दुनिया के किसी देश में है। हमारे राजा-महाराजा जहाँ देश की सुरक्षा के लिए हँसते-हँसते जान की बाजी लगा देते थे, वहीं आज के भारतीय तंबाकू के लिए खुशी-खुशी मर मिटते हैं। कोई हीरो गुटखे की पीक से देशभर में केसर फैला रहा है तो कोई बारातियों का स्वागत पान पराग से कर रहा है।  वास्तव में तंबाकू अनपढ़-गंवार लोग खाते हैं, पढ़े-लिखे तो निकोटिन खाते हैं। नाम बदलने से असर थोड़े न बदलेगा। नागनाथ नहीं तो सांपनाथ। फिर चाहे तंबाकू कहो या निकोटिन। प्रभाव तो कैंसर बनकर मौत का तांडव मचाना ही है। यह विश्व में सबसे ज़्यादा लत लगाऊ लतियाने वाली सनक है। इसे मुँह से निगला, चबाया, नाक से सूंघा जाता है और धूम्रपान की परखनली के माध्यम से फेफड़ों के राजमहल में  प्रवेश कराया जाता है। यह तो पंचतत्व बनकर हमारे ईर्द-गिर्द कुंडली मारकर बैठा है।

धूम्रपान से वे लोग अधिक प्रभावित होते हैं जो धूम्रपान करने वाले के साथ बैठे हों। धुआँ निकाले कोई निगले कोई। एक बार भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. बाबू राजेंद्र प्रसाद नाव में सफर कर रहे थे। उनके साथ एक युवक बैठा था। वह सिगरेट पी रहा था। उन्होंने आव देखा न ताव उस युवक को एक जोरदार चपत लगा दी। वैसे हम सभी जानते हैं कि उनका स्वभाव कितना मृदु है। बावजूद इसके उनका गुस्से में आना, वास्तव में मायने रखता है। उन्होंने युवक से कहा जब सिगरेट तुम्हारी है तो धुआँ भी तुम्हारा हुआ। इसे दूसरों पर क्यों छोड़ रहे हो? शायद आज वे होते तो तंबाकू पर निषेध लगाने के लिए रुपये का दंड विधान हटाकर तमाचे का हथकंडा अपनाते।

इसे भी पढ़ें: राजनीति की सखी मॉडलिंग (व्यंग्य)

तंबाकू का निकोटिन लाड़ला ढीले दाँतों की दीवारों पर रंगरेज का काम करता है। इसका काम इतना पक्का होता है कि कैंसर की परीक्षा में शत प्रतिशत अंकों से अव्वल आता है। राम नाम की सत्यता के लिए रामनाम सत्य का ककहरा गली-गली गूँजने पर बाध्य करता है। बहुत ही सिंपल कैल्कुलेशन है तंबाकू भरी जिंदगी का। दाँत तो दाँत जीभ, जबड़ों और गालों के अंदर तंबाकू देव अपने चमत्कार दिखाने लगते हैं। यहीं से मुंह में कैंसर की शुरुआत होती है। इसके बाद धीरे-धीरे मुंह का खुलना बंद हो जाता है और मौत का दरवाजा खुलने लगता है। 

तंबाकू की कई बातों के लिए तारीफ करनी चाहिए। यह धर्म, जात-पात, भाषा-भेद, ऊँच-नीच, अमीर-गरीब, देश-प्रदेश के भेदभावों से रहित है। यह अपना असर सब पर समान रूप से दिखाता है। उसका जैसा नाम है वैसा ही काम है। सिर्फ वह नशे की बात करता है। औषधि बनाने में इसकी उपयोगिता या सच्चाई महापुरुषों की भाँति है। महापुरुष तो उंगलियों पर गिने जा सकते हैं!  यह जिंदगी को कुछ दे न दे, लेकिन खोने का अवसर अवश्य देता है। इसे खाने से आपके अपनों पर भी असर पड़ता है। हो सके तो अपने लिए न सही अपनों के लिए ही सही तंबाकू या कोई भी हानिकारक पदार्थ का सेवन करना बंद कर दें। यही तंबाकू निषेध दिवस पर हमारा उपकार होगा।

डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ‘उरतृप्त'

(हिंदी अकादमी, मुंबई से सम्मानित नवयुवा व्यंग्यकार)

प्रमुख खबरें

RBI ने Repo Rate नहीं बदला, पर Iran संकट से Indian Economy पर मंडराया खतरा

Crude Oil Price में बड़ी गिरावट, America-Iran में सुलह के संकेतों से दुनिया को मिली राहत

Mumbai Indians की हार पर भड़के Captain Hardik Pandya, बोले- बल्लेबाज नहीं, गेंदबाज जिम्मेदार

Jasprit Bumrah के खिलाफ Guwahati में आया 15 साल के लड़के का तूफान, एक ही ओवर में मारे 2 छक्के