कारगिल युद्ध के हीरो थे सौरभ कालिया, सबसे पहले पाकिस्तानी घुसपैठ का लगाया था पता

By विजयेन्दर शर्मा | Jul 26, 2021

पालमपुर। कारगिल युद्ध के हीरो कैप्टन सौरभ कालिया के बलिदान को लोग आज भी भूले नहीं हैं। उनके परिजनों ने भी बेटे की याद में हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। कारगिल युद्ध में शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के परिजन ने अपने बेटे को सौरभ वन विहार बंदला (पालमपुर) में श्रद्धांजलि दी। कारगिल में पाक सैनिकों की घुसपैठ की सबसे पहले खबर देने वालों में जाट रेजिमेंट के शहीद कैप्टन सौरभ कालिया शामिल थे। उन्होंने और उनकी टीम ने पाकिस्तानियों की घुसपैठ का पता लगाया था। 

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भारत ने 13 मई, 1999 को पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा अपने इन बहादुर जवानों को बंदी बनाए जाने व उनकी नृशंस हत्या किए जाने के एक दिन बाद 14 मई 1999 को उन्हें मिसिंग घोषित किया था। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगडा के पालमपुर में कैप्टन कालिया की शहादत को सम्मान देने के लिए पालमपुर नगर के निकट खूबसूरत न्यूग्ल खड्ड के साथ आर्कषक स्मारक बनाया गया है। यहां पर पर्यटकों को कारगिल युद्व से जुड़ी जानकारी मिलती है वहीं यह एक ऐसा स्थल बन कर उभरा है जहां पर परिवार के साथ आकर समय बिताना हरेक व्यक्ति पंसद करता है। खूबसूरत झील, एकवेरियम, सैनिकों के स्टैच्यू, हरे-भरे पेड़-पौधों से युक्त स्थल, शहीद स्मारक, रेस्टोरेंट आदि ऐसी सुविधाएं यहां पर जोड़ी गई हैं। इतना ही नहीं अब यहां पर कुछ युवाओं ने रोमांचक खेलों को भी आरम्भ किया है।विडंबना का विषय है कि कैप्टन सौरभ कालिया की शहादत शायद देश भुला चुका है। यही वजह है कि अपने बेटे के लिए इंसाफ मांग रहे बुजुर्ग माता-पिता दर-दर भटक रहे हैं। ठोस प्रमाण के बावजूद सरकार आज तक शांत है और यह दुःख की बात है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने विपक्ष में रहते हुए इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन सत्ता में रहने पर उनकी राजनीति व कार्यनीति में अंतर साफ नजऱ आता है। हैरानी की बात तो यह है कि सौरभ कालिया का नाम सीमा पर जान गंवाने वाले शहीदों की सूची में भी शामिल नहीं है।

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