By संतोष उत्सुक | Apr 06, 2022
जैसे जैसे पानी कम होता जा रहा है लोग बहुत संजीदगी से अपने अपने तरीके से पानी बचाने के उपाय कर रहे हैं। अब सभी के अच्छे दिन वापिस आ गए हैं क्या हुआ अगर इस बार गर्मी थोड़ा ज्यादा पड़ने वाली है। हमारी जागरूक नीतियां अपना अपना काम कर रही हैं। शहर की प्राचीन व प्रसिद्ध सामाजिक संस्था ने निर्णय लिया कि गर्मी के मौसम में जल बचाने के उपायों पर, स्कूल के बच्चों में चित्रकला प्रतियोगिता करवाई जाए। महीनों बाद हुई संस्था की बैठक में एक मत से निर्णय लिया कि ‘पानी कैसे बचाएं’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर प्रतियोगिता के लिए सबसे बढ़िया परिसर वाला स्कूल चुना जाए। कारण सीधा रहा, वहां आयोजन करने में कोई दिक्कत नहीं होती। बच्चों के बैठने के लिए डेस्क, मेहमानों के लिए सोफे व आरामदायक कुर्सियां हैं। पीने के लिए एक्वागार्ड का पानी, बिजली न हो तो जेनेरटर है। चाय समोसे कैंटीन में आराम से मिल जाते हैं। गाड़ियों के लिए पार्किंग भी है। वहां नेताओं व अफसरों की पत्नियां शिक्षक हैं तभी तो मंत्री या बड़े सरकारी अफसर मुख्य अतिथि के रूप में उपलब्ध होने में आसानी है।
सबसे अच्छी बात यह रही कि मुख्य अतिथि ने स्कूल प्रबंधन को, निजी प्रयोग हेतु उपहार स्वरूप पैक्ड पानी की बोतलें दी जोकि शहर में लगी नई वाटर फैक्ट्री के सौजन्य से प्राप्त हुई थी। यह यूनिट मंत्रीजी के ‘बेरोज़गार’ सुपुत्र ने शहर में पीने के पानी की कमी दूर करने के लिए लगाया है। प्रतियोगिता ठीक से निपटने पर आयोजक संस्था के संतुष्ट सचिव ने धन्यवाद करते हुए कहा, ‘आज हम सबने मिलकर, जल कैसे बचाएं जैसे सामयिक व महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के माध्यम से समाज को अपना बहुमूल्य सहयोग दिया’।
आयोजन की विस्तृत रिपोर्ट जिसमें बहुत नाम थे, अगले दिन सभी अखबारों में फोटो सहित छपी।
- संतोष उत्सुक