Jammu and Kashmir: राजौरी में LOC के पास मंडराता दिखा पाकिस्तानी संदिग्ध ड्रोन, सुरक्षाबलों ने शुरू किया बड़ा तलाशी अभियान

By रेनू तिवारी | Jul 06, 2026

जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जिलों में आतंकवादियों की घुसपैठ और हथियारों की तस्करी के लिए पाकिस्तानी साजिशें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। सोमवार तड़के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) से सटे अग्रिम इलाकों में एक बार फिर संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन की हलचल देखी गई। ड्रोन की इस संदिग्ध गतिविधि के बाद भारतीय सेना और स्थानीय पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर एक बड़े स्तर पर तलाशी अभियान (Search Operation) की शुरुआत की है। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह घटना रविवार देर रात की है, जिसके बाद सोमवार सुबह होते ही सुरक्षाबलों ने चप्पे-चप्पे को खंगालना शुरू कर दिया।

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, रविवार और सोमवार की दरमियानी रात राजौरी जिले के सुंदरबनी सेक्टर के अग्रिम गांवों मीनका और बेरीपट्टन के आसमान में एक उड़ती हुई संदिग्ध वस्तु देखी गई। यह वस्तु हूबहू एक सैन्य या जासूसी ड्रोन जैसी लग रही थी।

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नियंत्रण रेखा (LoC) के बिल्कुल करीब स्थित इन गांवों के ऊपर यह ड्रोन कुछ समय तक मंडराता रहा। भारतीय सीमा में घुसपैठ करने के कुछ ही मिनटों बाद, यह संदिग्ध ड्रोन वापस पाकिस्तान की सीमा (नियंत्रण रेखा के पार) की ओर लौट गया। सीमा पर तैनात सतर्क जवानों ने जैसे ही इसकी भिनभिनाहट सुनी और रोशनी देखी, तुरंत पूरे सुरक्षा तंत्र को हाई अलर्ट पर डाल दिया गया।

सुबह होते ही घेराबंदी: क्या था ड्रोन का मकसद?

अधिकारियों ने बताया कि ड्रोन के वापस लौट जाने के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने बिना वक्त गंवाए मीनका और बेरीपट्टन सहित आसपास के पूरे जंगली और मैदानी इलाके की घेराबंदी कर दी। सोमवार सुबह की पहली किरण के साथ ही सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों ने संयुक्त रूप से तलाशी अभियान (Combing Operation) शुरू किया।

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सुरक्षाबलों को किन चीजों की थी आशंका?

आमतौर पर सीमा पार से आने वाले इन ड्रोनों का इस्तेमाल पाकिस्तान में बैठे आतंकी आका दो मुख्य मकसदों के लिए करते हैं:

हथियारों और विस्फोटकों की डिलीवरी: घाटी में सक्रिय आतंकियों के लिए आईईडी (IED), पिस्तौल, ग्रेनेड या अत्याधुनिक राइफलें गिराना।

नशीले पदार्थों की तस्करी (नार्को-टेररिज्म): पंजाब और जम्मू-कश्मीर के युवाओं को निशाना बनाने तथा आतंकी फंडिंग के लिए करोड़ों रुपये की हेरोइन या अन्य ड्रग्स भारतीय क्षेत्र में ड्रॉप करना।

इसी आशंका के तहत सुरक्षाबलों ने मेटल डिटेक्टरों और खोजी कुत्तों (Sniffer Dogs) की मदद से खेतों, झाड़ियों और संदिग्ध ठिकानों की बारीकी से जांच की ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्रोन ने जाते-जाते कोई खेप तो नीचे नहीं गिराई थी।


सुरक्षाबलों की मुस्तैदी: फिलहाल कोई संदिग्ध सामग्री नहीं

राहत की बात यह रही कि कई घंटों तक चले इस गहन तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षाबलों को इलाके से कोई भी संदिग्ध, आपत्तिजनक या अवैध सामग्री बरामद नहीं हुई है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि या तो ड्रोन केवल रेकी (जासूसी) करने के मकसद से आया था या फिर जवानों की सतर्कता के कारण वह अपनी खेप गिराने में नाकाम रहा। हालांकि, एहतियात के तौर पर सीमा से सटे अन्य सेक्टरों में भी निगरानी को दोगुना कर दिया गया है।

सुरक्षा ग्रिड हुआ मजबूत:

पिछले कुछ समय में जम्मू संभाग के राजौरी, पुंछ और कठुआ जिलों में आतंकी गतिविधियों और ड्रोन इनफिल्ट्रेशन (ड्रोन घुसपैठ) के मामलों में तेजी आई है। इसे देखते हुए भारतीय सेना ने LoC पर 'एंटी-ड्रोन सिस्टम' और हाई-टेक सर्विलांस कैमरों की तैनाती बढ़ा दी है।

सीमा पार की नई कूटनीति: 'ड्रोन' बना पाकिस्तान का नया हथियार

परंपरागत रूप से होने वाली घुसपैठ में भारतीय सेना के हाथों लगातार मिल रही शिकस्त के बाद, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठनों ने अब 'लो-कॉस्ट हाई-टेक' यानी ड्रोन तकनीक को अपना मुख्य हथियार बना लिया है। घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों का फायदा उठाकर रात के अंधेरे में ये ड्रोन भारतीय सीमा में दाखिल होते हैं।

राजौरी की इस ताजा घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि भले ही सरहद पर सीजफायर (युद्धविराम) लागू हो, लेकिन पाकिस्तान समर्थित तत्व भारत में अशांति फैलाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ना चाहते। फिलहाल सुंदरबनी और आसपास के इलाकों में सेना का कड़ा पहरा है और स्थानीय ग्रामीणों से भी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को देने की अपील की गई है।

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