By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 24, 2020
हैदराबाद। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि धर्मनिरपेक्षता हर भारतीय के खून में समायी है और अल्पसंख्यक किसी दूसरे देश के मुकाबले भारत में कहीं अधिक सुरक्षित हैं, साथ ही उन्होंने कुछ देशों को भारत के अंदरूनी मामलों से दूर रहने की सलाह भी दी। वारंगल में आंध्रा विद्याभी वर्धनी (एवीवी) शिक्षण संस्थान के 75 साल पूरा होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद नायडू ने अपने संबोधन में कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ भारतीय संस्कृति का मूल भाव है।
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नायडू ने कहा कि विकास के लिए शांति पूर्वआवश्यक शर्त है। लोकतंत्र में हर किसी को असंतोष जाहिर करने और प्रदर्शन का अधिकार है लेकिन यह शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपने जीवन में सकारात्मक व्यवहार अपनाने और अपने नजरिये में रचनात्मकता लाने का अनुरोध किया। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकारों से देश में मातृभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए रोजगार सृजन में स्थानीय भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ाने का अनुरोध किया।