2 दिन में 2 संकेत, क्या शिवपाल यादव बीजेपी में नहीं जा रहे हैं?

By अजय कुमार | Apr 18, 2022

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चचा शिवपाल यादव के बीजेपी में जाने की अटकलों के बीच शिवपाल यूटर्न लेते हुए योगी सरकार पर हमलावर हो गए हैं। शिवपाल ने बीजेपी के खिलाफ एक के बाद एक ट्विट करके अपने इरादे साफ कर दिए। भतीजे अखिलेश यादव से नाराज चल रहे शिवपाल यादव जिस तरह से बीजेपी के दिग्गज नेताओं से मुलाकात करके भाजपा की तरफ पींगे बढ़ा रहे थे,अब उस पर ग्रहण लग गया है। शिवपाल के बीजेपी विरोधी कई ट्विट आने से अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं कि शिवपाल के लिए बीजेपी ने अभी तक अपने दरवाजे नहीं खोले हैं। जिससे शिवपाल नाराज हो गए हैं। शिवपाल की नाराजगी की खबरें आने के बाद उनका अगला कदम क्या होगा, इस पर सस्पेंस बरकरार है। वैसे राजनीति के कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने एक बार फिर शिवपाल और अखिलेश के बीच पैचअप करा दिया है।

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बात यहीं नहीं थमी दूसरे दिन सोमवार को शिवपाल यादव की ओर सुप्रीम कोर्ट की तारीफ किए जाने के बाद भी इसके मायने तलाशे जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने दो अहम फैसलों में आजम खान को राहत दी थी तो दूसरी तरफ लखीमपुर खीरी में किसानों को जीप से कुचलने के आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा की जमानत रद्द कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ देर बाद शिवपाल ने ट्वीट करते सुप्रीम कोर्ट की निष्पक्षता की तारीफ की। उन्होंने बिना किसी फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इसलिए सर्वाेच्च न्यायालय सर्वाेच्च है। सर्वाेच्च न्यायालय की असंदिग्ध स्वतंत्रता, निष्पक्षता और स्वायत्तता को नमन। भारत की न्याय व्यवस्था अम्मीद की एक किरण है। इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स में जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े केस में आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की भी बात कही गई है। माना जा रहा है कि शिवपाल का ट्वीट आजम खान से जुड़े फैसले को लेकर भी हो सकता है या फिर दोनों ही फैसलों के संदर्भ में उन्होंने यह बात कही है। हालांकि, दोनों ही फैसलों से भाजपा सरकार को झटका लगा है और ऐसे में शिवपाल का यह ट्वीट भाजपा सरकार पर निशाना के रूप में ही देखा जा रहा है।

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लब्बोलुआब यह है कि बीजेपी शिवपाल यादव को साथ लाने में काफी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है,वह नहीं चाहती है कि शिवपाल को पार्टी में लिए जाने के बाद कोई बघेड़ा खड़ा हो।फिर सबसे बड़ी बात यह है कि शिवपाल जैसे नेताओं को पार्टी में शामिल किए जाने से हमेशा यह खतरा बना रहता है कि कब यह भावनाओं में बहकर पार्टी से बगावत नहीं कर दें। बीजेपी छोड़ने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या इसकी सबसे बड़ी मिसाल है,स्वामी के बीजेपी छोड़ते ही उनकी पुत्री और बीजेपी की सांसद संघप्रिया मौर्या भी बीजेपी के खिलाफ जहर उगलने लगी हैं।

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