महंत नरेंद्र गिरी मौत मामले की जांच के लिए SIT का हुआ गठन, सुसाइड नोट में बलबीर गिरी का भी नाम

By अनुराग गुप्ता | Sep 21, 2021

प्रयागराज। अखिल भारतीय अखाड़ परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी मौत मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। जिसकी अगुवाई सीओ अजीत सिंह चौहान करेंगे। इस एसआईटी में कुल 18 सदस्य होंगे, जो मामले को अच्छी तरह से खंगालेंगे।  

इसे भी पढ़ें: महंत नरेंद्र गिरी को योगी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- यह हमारे आध्यात्मिक और धार्मिक समाज की अपूरणीय क्षति है 

उलझ रही है मौत की मिस्ट्री

शुरुआती जानकारी के आधार पर पुलिस ने आत्महत्या का मामला बताया लेकिन मौत के कारणों को जानने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) प्रशांत कुमार ने बताया था कि महंत नरेंद्र गिरी को उनके अनुयायिओं ने दरवाजा तोड़कर फंदे से उतारा। मौके पर एक कथित सुसाइड नोट मिला है, जिसमें महंत के अपने शिष्य आनंद गिरि की प्रताड़ना से परेशान होने की बात कही गई है। आपको बता दें कि इस सुसाइड नोट बलबीर गिरी का नाम भी लिखा हुआ है।

8 पेज का सुसाइड नोट आया सामने 

सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरी ने आत्महत्या करने का निर्णय लिया। कथित सुसाइड नोट में लिखा है कि मेरी मौत की जिम्मेदारी आनंद गिरी, अद्या प्रसाद तिवारी, संदीप तिवारी की होगी।  प्रयागराज के सभी पुलिस अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध करता हूं। मेरे आत्महत्या के जिम्मेदार उपरोक्त लोगों पर कानूनी कार्यवाही की जाए, जिससे मेरी आत्मा को शांति मिले।  

इसे भी पढ़ें: भय्यू जी महाराज से नरेंद्र गिरी तक... हत्या-आत्महत्या के बीच के बीच संतों की उलझी कहानी 

CBI जांच की मांग वाली याचिका दायर

महंत नरेंद्र गिरी की कथित आत्महत्या की सीबीआई से जांच कराने के अनुरोध के साथ इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को उनके ईमेल पर एक पत्र याचिका भेजी गई है। 

प्रमुख खबरें

Reliance की 3 अरब डॉलर की Green Ammonia डील, South Korea से हुआ 15 साल का मेगा समझौता।

ईरान से नहीं था कोई खतरा, इजरायल की वजह...अमेरिकी प्रशासन में युद्ध को लेकर पड़ी फूट, ट्रंप के टॉप अधिकारी ने दिया इस्तीफा!

IPL 2026 से पहले RCB को लगा बड़ा झटका, Star Bowler Josh Hazlewood शुरुआती मैचों से बाहर!

हमसे न हो पाएगा, तालिबान से निपटने में लगे हैं, आप अपना खुद देख लो...मुनीर ने सऊदी-पाक के NATO वाले समझौते से झाड़ लिया पल्ला?