...इसलिए मनमोहन कहलाए, ''एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर''?

By संजय सक्सेना | Dec 29, 2018

बात करीब डेढ़ दशक पुरानी है, जब 2004 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद सबसे बड़ा गठबंधन होने के नाते यूपीए का शीर्ष नेतृत्व जोड़तोड़ कर केन्द्र में सरकार बनाने का सपना साकार करने जा रहा था। सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री के रूप में ताजपोशी होना तय थी, लेकिन सोनिया गांधी का विदेशी मूल का होना भारी पड़ा। सरकार बनाने का दावा ठोंकने के लिये सोनिया गांधी के ने नेतृत्व में तमाम दलों के नेता राष्ट्रपति के पास पहुंचे भी, लेकिन जब यह लोग लौट कर आये तो नजारा पूरा बदल चुका था। कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने कथित रूप से त्याग की मूर्ति बनते हुए अपनी जगह सरदार मनमोहन सिंह का नाम प्रधानमंत्री के रूप में आगे कर दिया, जबकि कांग्रेस में प्रणव मुखर्जी जैसा कद्दावर नेता मौजूद था, जिनकी अपनी अलग शख्सियत थी। प्रणव को कांग्रेस का 'चाणक्य' माना जाता था, उनकी राजनैतिक सूझबूझ गजब की थी, लेकिन दस जनपथ को पीएम की कुर्सी के लिये एक ऐसा नेता चाहिए था, जो देश से अधिक गांधी परिवार के लिए वफादार हो। गांधी परिवार की सोच के इस फ्रेम में मनमोहन सिंह बिल्कुल फिट बैठते थे। इसी लिये मनमोहन सिंह की प्रधानमंत्री की कुर्सी पर ताजपोशी को एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर कहा जाने लगा। 2004 के बाद 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद भी कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी। इस बार लग रहा था कि राहुल गांधी की पीएम के रूप में ताजपोशी हो जाएगी, लेकिन राहुल की अपरिपक्ता के कारण ऐसा हो नहीं पाया और एक बार फिर मनमोहन पीएम बन गये।

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'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' के बारे में संजय बारू बताते हैं कि उन्होंने कभी मनमोहन सिंह का मीडिया सलाहकार रहने के दौरान किताब लिखने की प्लानिंग नहीं की थी। उनका मानना था कि यह स्वाभाविक है कि एक नेता या तो प्रशंसा का पात्र हो सकता है या फिर घृणा का, लेकिन उपहास का पात्र नहीं बनना चाहिए। संजय बारू ने लिखा है कि जब उन्होंने 2008 में पीएमओ की नौकरी छोड़ी, तब मीडिया मनमोहन सिंह की छवि काफी अच्छी थी। उन्हें सिंह इज किंग कहा जाता था। 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर में संजय बारू का किरदार अक्षय खन्ना ने निभाया है। महाराष्ट्र में यूथ कांग्रेस फिल्म का विरोध कर रहा है। 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' में मनमोहन सिंह का किरदार निभा रहे अनुपम खेर का कहना है कि फिल्म का विरोध करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा, द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर का जितना विरोध होगा, उतनी ही फिल्म को पब्लिसटिी मिलेगी। फिल्म की कहानी जिस किताब पर आधारित है, वो 2014 में आई थी। तब कोई विरोध क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा, हाल ही में राहुल गांधी जी का ट्वीट पढ़ा था, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उन्होंने बोला था। इसलिए मुझे लगता है कि राहुल गांधी को अब फिल्म का विरोध कर रहे, लोगों को डांटना चाहिए क्योंकि वे गलत कर रहे हैं।

- संजय सक्सेना

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