Udhampur में मुठभेड़ के दौरान जवान शहीद, Kupwara में बारूदी सुरंग विस्फोट में भी एक जवान की जान गयी, आतंकी घेरे गये

By नीरज कुमार दुबे | Dec 16, 2025

जम्मू-कश्मीर एक बार फिर आतंकवाद की कायर साज़िशों और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस का गवाह बना। हम आपको बता दें कि उधमपुर जिले के मजालता क्षेत्र के सोआन गांव में सोमवार शाम आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में पुलिस के विशेष अभियान समूह (एसओजी) के जवान अमजद पठान शहीद हो गए। यह मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब सुरक्षाबलों ने जंगल से सटे इस दूरदराज़ इलाके में तीन आतंकवादियों की मौजूदगी की सटीक सूचना पर तलाशी अभियान शुरू किया। माना जा रहा है कि ये आतंकी पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं।

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हम आपको बता दें कि उधमपुर का बसंतगढ़ क्षेत्र उस मार्ग पर पड़ता है, जिसका इस्तेमाल आतंकी अक्सर अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ कर डोडा-किश्तवाड़ होते हुए कश्मीर घाटी में प्रवेश के लिए करते रहे हैं।

इसी बीच, कुपवाड़ा जिले के त्रेहगाम क्षेत्र में बारूदी सुरंग विस्फोट में सेना के ‘13 जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री’ के हवलदार जुबैर अहमद शहीद हो गए। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें सैन्य अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह घटना आतंकियों द्वारा बिछाए गए मौत के जाल की एक और भयावह मिसाल है।

वहीं आतंकवाद के खिलाफ व्यापक कार्रवाई के तहत जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस इकाई ने घाटी के सात जिलों में तड़के छापेमारी की। इन छापों का मकसद आतंकवाद में संलिप्त तत्वों, आतंकियों का महिमामंडन करने वालों और कट्टरपंथ को हवा देने वाले नेटवर्क को बेनकाब करना है। इसके साथ ही श्रीनगर के नतिपोरा इलाके के एक कब्रिस्तान से हथियार और गोला-बारूद की बरामदगी ने आतंकियों की मानसिकता और उनकी नापाक रणनीति को उजागर कर दिया। कब्रिस्तान जैसी जगह को भी हथियारों का गोदाम बनाने से ये लोग नहीं चूके।

देखा जाये तो उधमपुर से कुपवाड़ा और श्रीनगर तक फैली ये घटनाएं आतंकवाद के उस सड़े-गले ढांचे की परतें हैं, जिसे पाकिस्तान प्रायोजित नेटवर्क लगातार ज़िंदा रखने की कोशिश कर रहा है। आतंकियों का मकसद साफ है डर फैलाना, शांति को बाधित करना और निर्दोषों व सुरक्षा बलों के खून से अपनी नाकाम सियासत को खाद देना। लेकिन हर मुठभेड़, हर शहादत उनके इस भ्रम को और तोड़ती है कि वे कश्मीर की तक़दीर बदल सकते हैं।

एक तरफ हमारे जवान हैं जो अंधेरी रातों, बर्फीली पहाड़ियों और बारूदी सुरंगों के बीच अपनी जान हथेली पर रखकर खड़े हैं; दूसरी तरफ वे कायर आतंकी, जो कब्रिस्तानों में हथियार छिपाते हैं और सीमा पार बैठे आकाओं के इशारों पर मौत का धंधा चलाते हैं। आतंकियों की यह हिम्मत नहीं कि वे सामने से लड़ सकें, इसलिए छिपकर वार करते हैं, सुरंगें बिछाते हैं और धार्मिक स्थलों की आड़ लेते हैं। यही उनकी असली पहचान है यानि डरपोक, बौने और मानवता के दुश्मन।

वहीं सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई यह साफ संदेश देती है कि अब कोई ‘सेफ ज़ोन’ नहीं बचेगा। जंगल हो या गांव, शहर हो या कब्रिस्तान, आतंक के हर अड्डे को ढूंढकर नेस्तनाबूद किया जाएगा। काउंटर इंटेलिजेंस की छापेमारी और हथियारों की बरामदगी इस बात का संकेत है कि अब केवल आतंकवादी ही नहीं, बल्कि विचारधारा और प्रचार के ज़हर को भी जड़ से उखाड़ने की तैयारी है।

बहरहाल, आज ज़रूरत इस बात की है कि आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई सिर्फ सीमा पर नहीं, समाज के हर कोने में लड़ी जाए। जो लोग आतंकियों का महिमामंडन करते हैं, जो चुपचाप उनका साथ देते हैं, वे भी उतने ही दोषी हैं। शहीद अमजद पठान और जुबैर अहमद की कुर्बानी हमें याद दिलाती है कि यह लड़ाई आधी-अधूरी नहीं छोड़ी जा सकती। आतंकियों की बखिया उधड़ चुकी है और अब बारी उनके आकाओं की है। कश्मीर की धरती ने तय कर लिया है कि यहां बंदूक नहीं, संविधान चलेगा; यहां डर नहीं, हौसला जीतेगा। और जो भी इस सच्चाई को चुनौती देगा, उसका अंजाम वही होगा जो हर आतंकी का होता है यानि नामोनिशान तक मिट जाना।

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