हनुमान जी की पूजन से शांत हो जाएगा शनिदेव का गुस्सा

By कमल सिंघी | Apr 04, 2020

शनिवार का दिन शनिदेव और हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए बहुत अच्छा दिन माना जाता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से दुख और भय से राहत मिलती हैं तो वहीं शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं। हिंदू धर्म ग्रंथों में लिखा हैं, कि शनिदेव ने हनुमान जी के एक बार वचन दिया था और कहा था कि जो इंसान आपकी आराधना करेगा इसकी मैं हमेशा रक्षा करुंगा। इसी वजह से हनुमान जी के भक्तों पर शनिदेव की भी कृपा बनी रहती हैं। शनिदेव कभी भी हनुमानजी की पूजन करने वाले भक्तों का नुकसान नहीं करते हैं। तो फिर दोस्तों हर शनिवार को शनिदेव की पूजा के साथ श्री हनुमान जी की पूजा भी करें। अगर मंदिर नहीं जा पा रहे हैं तो घर में ही पूजन करें। सच्चे मन से आराधना करने पर श्री हनुमान जी जरुर प्रसन्न होते हैं और उनके भक्तों को हमेशा शुभ फल की प्राप्ति होती हैं। 

शनिवार के दिन सूर्योदय के समय स्नान करने के बाद श्री हनुमते नम: का मंत्र जाप करें। शनिवार को सुबह के समय तांबे के लोटे में जल और सिंदूर मिश्रित कर श्री हनुमान जी को अर्पित करें। लगातार दस शनिवार ऐसा करें और श्री हनुमान जी को गुड़ का भोग जरुर लगाएं। हर शनिवार को श्री हनुमान जी के चालीसा का पाठ जरुर करें। 10 शनिवार तक श्री हनुमान जी  के मंदिर में या घर में श्री हनुमान जी के चित्र पर केले का प्रसाद चढ़ाएं। चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर श्री हनुमान जी को अर्पित करने से श्री हनुमान जी प्रसन्न होते हैं। यह उपाय शनिवार के साथ मंगलवार भी किए जा सकते हैं।

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हनुमान जी और शनिदेव का शनिवार विशेष दिन 

धार्मिक मान्यता है कि शनिवार को हनुमानजी की पूजा करने से शनि की साढ़ेसाती से होने वाली समस्याओं से पूरी तरह से राहत मिलती हैं। राम भक्त बजरंगबली की शनिवार को पूजा से शनि के हर प्रकार के प्रकोप पर काबू हो जाता है। हनुमान जी की पूजा से सूर्य-मंगल के अवाला शनि की शत्रुता और योगों के कारण आई समस्याओं से भी राहत मिलती हैं। शनिवार का दिन दोनों ही भगवान का प्रिय दिन माना जाता है। इस दिन शनिदेव और हनुमान जी की आराधना होती हैं। कई शनि मंदिरों में हनुमान जी भी शनिदेव के पास ही विराजमान होते हैं। दरअसल कई भक्त शनिदेव की पूजा के साथ हनुमान जी की भी पूजा करते हैं। 

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जब शनिदेव को हनुमान जी ने आजादी दिलाई

रामायण युग के समय हनुमान जी, सीता माता को खोजते हुए लंका पहुंच गए थे, तब वहां एक कारागार में शनिदेव को उल्टा लटके हुए मिले। पवनपुत्र ने जब शनि से उल्टा लटके होने का कारण जाना तो बताया कि रावण ने अपने योग बल से उन समेत कई ग्रहों को कैद कर लिया। यह बात जानकर हनुमान जी ने शनि को रावण की जेल से आजादी दिलाई थी। इससे प्रसन्‍न होकर शनिदेव ने हनुमान जी से वरदान मांगने को कहा। हनुमान जी ने वरदान में एक वचन मांग लिया था। शनि को कलियुग में हनुमान भक्‍तों को अशुभ फल नहीं देना होगा। बजरंगबली ने शनि के कष्टों को दूर करके उनकी रक्षा की थी इसलिए शनि ने यह वचन दे दिया था कि कोई भी व्यक्ति शनिवार को हनुमान की पूजा करेगा उसे वे कोप भाजन नहीं बनायेंगे। रामायण काल से शनिदेव की कृपा हनुमान जी के भक्तों पर बनी रहती हैं।

- कमल सिंघी

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