भारतीय मध्यस्थता प्रणाली कुशल होनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट जज

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 09, 2019

नई दिल्ली। यदि अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के बीच भरोसा कायम करना है तो यह बेहद जरूरी है कि भारत में एक ऐसी विवाद निवारण प्रणाली स्थापित की जाए जिसमें ज्यादा समय न लगे, यह कहना था भारतीय सुप्रीम कोर्ट के जज माननीय जस्टिस श्री बी आर गवई का जो आज नई दिल्ली में ऐसोचैम द्वारा आयोजित 'ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन इंटरनेशनल कमर्शियल आर्बिट्रेशन' विषय पर बोल रहे थे।

कॉन्फ्रेंस को अपनी शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा, 'इस प्रकार के सम्मेलन उन अहम तथा व्यावहारिक पहलुओं को हल करने में दूरगामी परिणाम देंगे जिन समस्याओं से भारतीय आर्बिट्रेशन प्रणाली को दो−चार होना पड़ता है तथा इस तरह इनसे समाधान हासिल होंगे।' उन्होंने आगे कहा कि आज का यह सम्मेलन भारत को एक पसंदीदा आर्बिट्रेशन केन्द्र बनाने की दिशा में कारगर साबित होगा। इससे भारत में अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल विवादों को न्यूनतम संभव समय में सुलझाने का मार्ग प्रशस्त होगा। ऐसी कोशिशों से भारत दुनिया की सबसे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनेगा।'

ऐसोचैम के इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के जज माननीय जस्टिस श्री हरि शंकर ने भारत में अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन के वैधानिक परिदृश्य पर बात की। उन्होंने कहा कि आज अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है तथा आने वाले वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय पटल पर कारोबारी विवादों का निपटारा पूरी तरह आर्बिट्रल प्रोसैस (मध्यस्थ प्रक्रिया) से किया जाएगा बजाय मुकद्दमेबाज़ी के। इसलिए ऐसे सम्मेलन बहुत आवश्यक हैं जहां हमें अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन की बारीकियों को समझने का मौका मिले और ऐसे आयोजन अक्सर होते रहने चाहिए। 

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ऐसोचैम के उपाध्यक्ष श्री विनीत अग्रवाल ने स्वागत भाषण में कहा, 'ऐसोचैम नेशनल काउंसिल ऑन आर्बिट्रेशन का प्रयास है कि देश में आर्बिट्रेशन प्रैक्टिशनरों को प्रोत्साहित किया जाए तथा उन्हें मौका दिया जाए कि वे विदेशों में अपने सकमक्षों से सम्पर्क कायम कर सकें। अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन पर आज का यह सम्मेलन हमारे इस प्रयास का हिस्सा है कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों को एक मंच पर लाकर उन मुद्दों पर बहस एवं विमर्श किया जाए जो हर किसी चिंता का विषय हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'विवाद सुलझाने की प्रक्रिया का भारतीय अर्थव्यवस्था तथा भारत में व्यापार करने के बारे में वैश्विक नजरिए पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा। व्यापार करने की आसानी के संबंध में विश्व बैंक द्वारा दी गई रैंकिंग में इसका स्पष्ट संकेत है। इसलिए हमारे लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि हम संशोधित आर्बिट्रेशन एंड रिकंसिलिएशन बिल तथा ऐस्टैबलिशमेंट ऑफ कमर्शियल पार्टनर्स के प्रभावों और अर्थ पर चर्चा करें। भारत अपनी कानूनी व्यवस्था में विश्वास निर्माण के रास्ते पर अग्रसर है, किसी भी देश को अंतर्राष्ट्रीय आर्बिट्रेशन का स्थान बनने के लिए यह बुनियादी शर्त है।'

विशेष संबोधन देते हुए डॉ रिचर्ड विल्सन क्यूसी, एलएल.डी, क्वींस काउंसल, बैरिस्टर, डॉक्टर ऑफ लॉ, द 36 ग्रुप (बैरिस्टर्स चैम्बर्स), लंदन, यूके ने अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन का संक्षिप्त अवलोकन दिया और बताया कि अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन का पसंदीदा स्थान बनने के लिए भारत को क्या करना होगा। 

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भारतीय व्यापार और व्यवसाय के भविष्य हेतु अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल विवाद निवारण की भूमिका पर बल देते हुए श्री विल्सन इस जरूरत को रेखांकित किया कि भारत को अपने खुद के आर्बिट्रेशन संस्थान विकसित करने होंगे जो कि अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन के उद्देश्य तथा भावी उद्देश्यों के लिए उपयुक्त हों। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान भारत को वैश्विक व्यापार में बड़ी भूमिका निभाने में मददगार साबित होंगे। जब सीमाओं के आर−पार भारी मात्रा में कारोबार होगा तो जाहिर है कि व्यापारिक पक्षों के मध्य विवादों में भी बढ़ोतरी होगी। 

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश श्री मुकुंदकम शर्मा ने भारत में आर्बिट्रेक्शन के कॉन्सेप्ट के विकास तथा आर्बिट्रेशन कानूनों में संशोधनों के बारे में बात की। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि देश में आर्बिट्रेशन कार्यवाही को तेज़ करने की आवश्यकता है ताकि भारत को कमर्शियल आर्बिट्रेशन का अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र बनाया जा सके।

इस सम्मेलन में कई प्रतिष्ठित कानूनविदों ने शिरकत की जिनमें शामिल थे− जस्टिस सूर्य कांत माननीय जज−भारतीय सुप्रीम कोर्टय श्री नील्स शाइरसिंग, स्वतंत्र आर्बिट्रेटर, सदस्य− आर्बिट्रेशन चैम्बर्स हांग कांग व लंदन, दुबई, यूएईय सुश्री वसंती सेल्वारत्नम क्यूसी, द 36 ग्रुप, लंदन, यूकेय प्रोफेसर मलिक लाज़्ाूज़ी, यूनिवर्सिटी पेरिस प्प् पैन्थियॉन−असास, फ्रांसय डॉ जमशीद पीरू, वाइस प्रेसिडेंट− ड।त्ब् ऐडवाइज़री बोर्ड, बैरिस्टर, द 36 ग्रुप लंदन यूके व पीरू चैम्बर्स, मॉरिशसय श्री के के शर्मा, चेयरमैन, ऐसोचैम नेशनल काउंसिल ऑन आर्बिट्रेशन व वरिष्ठ वकील−भारतीय सुप्रीम कोर्टय श्री दीपक चौहान, को−चेयरमैन, ऐसोचैम नेशनल काउंसिल ऑन आर्बिट्रेशन व डायरेक्टर, लीगल, वेलस्पन गु्रप। 

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ऐसोचैम ने ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑन इंटरनेशनल कमर्शियल आर्बिट्रेशन का आयोजन किया ताकि संशोधित आर्बिट्रेशन एंड कंसिलिएशन बिल तथा कमर्शियल कोर्ट की स्थापना के प्रभावों एवं निहित अर्थों पर चर्चा की जा सके। इस सम्मेलन में जिन अहम मसलों पर चर्चा हुई उनमें शामिल थे− भारतीय आर्बिट्रेशन परिदृश्य में प्रगति, संस्थानिक आर्बिट्रेशन बनाम तदर्थ आर्बिट्रेशन, अंतर्राष्ट्रीय कमर्शियल आर्बिट्रेशन का भारत एक पसंदीदा स्थान − प्रमुख मुद्दे व चुनौतियां, आर्बिट्रेशन प्रक्रिया पूर्व संबंधित मुद्दे, आर्बिट्रेशन क्लॉसिस की ड्राफ्टिंग से जुड़े मुद्दे, विवादों को सुलझाने के लिए फास्ट ट्रैक प्रावधान, विदेशी पुरस्कारों को लागू करना, आर्बिट्रेशन में न्यायालयों की भूमिका, निवेशक−सरकार आर्बिट्रेशनरू भारतीय−यूरोपीय यूनियन अनुभव व हालिया प्रगति, द सिंगापुर कन्वेंशन 2019 तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक विवादों के हल हेतु मध्यस्थता का उपयोग।

ऐसोचैम के बारे में 

ऐसोचैम ने सन् 1920 में भारतीय उद्योग के कल्याण हेतु अपनी कोशिशों का सफर शुरु किया। इसे प्रोमोटर चैम्बर्स ने स्थापित किया जो भारत के सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। 400 से अधिक चैम्बर्स और ट्रेड ऐसोसिएशनें इससे जुड़ी हुई हैं और यह भारत भर में 4.5 लाख से ज्यादा सदस्यों को सेवाएं दे रही है। ऐसोचैम भारतीय उद्योग के लिए ज्ञान का स्त्रोत बन कर उभरी है, जो ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में वृद्धि एवं विकास के आयामों को पुनरूपरिभाषित करने के लिए तैयार है।

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