Malda की घटना से लगा Mamata को लगा बड़ा झटका, Supreme Court बोला- West Bengal में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमराई

By नीरज कुमार दुबे | Apr 02, 2026

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के शासन को विपक्ष तो जंगलराज बताता ही है साथ ही समय समय पर सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय की टिप्पणियों से भी राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते रहे हैं। अब दो चरणों में कराये जा रहे विधानसभा चुनावों के बीच उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था के पूरी तरह पटरी से उतरने संबंधी जो टिप्पणी की है वह ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार और उनकी पार्टी के लिए करारा झटका है। अदालत की टिप्पणी से ममता बनर्जी के शासन पर गंभीर सवाल उठे हैं। अदालत ने न केवल राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि इसे कानून व्यवस्था की पूर्ण विफलता बताते हुए शीर्ष अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।

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सर्वोच्च न्यायालय ने इस पूरे प्रकरण को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और सुनियोजित बताया। अदालत ने कहा कि यह केवल विरोध नहीं था, बल्कि न्यायिक अधिकारियों को मानसिक रूप से डराने और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास था। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

अदालत ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए? न्यायालय ने यह भी कहा कि यह राज्य सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि पहले से सूचना होने के बावजूद अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

इस घटना के बाद अदालत ने कई महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए हैं। चुनाव आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह केंद्रीय बलों की तैनाती सुनिश्चित करे ताकि न्यायिक अधिकारी सुरक्षित माहौल में अपना कार्य कर सकें। साथ ही जिन अधिकारियों को खतरा महसूस हो रहा है, उनके घरों पर भी सुरक्षा व्यवस्था की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि सुनवाई के दौरान भीड़ को सीमित रखा जाए और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।

हम आपको बता दें कि मालदा की घटना का विवरण काफी चिंताजनक है। विरोध प्रदर्शन कलियाचक क्षेत्र के एक कार्यालय के बाहर शुरू हुआ था, जहां लोगों ने अधिकारियों से मिलने की मांग की। अनुमति न मिलने पर भीड़ ने कार्यालय को घेर लिया और सड़कों को जाम कर दिया। इस दौरान कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित हुआ। देर रात जब अधिकारियों को निकाला गया तो उनके वाहनों पर पथराव और हमले की भी खबरें सामने आईं।

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और मुख्यमंत्री के बयानों से माहौल और बिगड़ा है। विपक्ष ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत बताया है। अब सवाल यह है कि इस फैसले का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों पर क्या असर पड़ेगा, देखा जाये तो यह घटना और अदालत की सख्त टिप्पणी राज्य सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। चुनावी माहौल में कानून व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, जिसका विपक्ष पूरा फायदा उठाने की कोशिश करेगा।

देखा जाये तो सर्वोच्च न्यायालय की यह सख्ती एक संदेश भी है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा या डराने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और इसका राजनीतिक समीकरणों पर कितना असर पड़ता है।

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