By अभिनय आकाश | Feb 08, 2025
घरेलू हिंसा के मामलों को अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ संभालने की जरूरत पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि किसी आरोपी के परिवार के सदस्यों को आपराधिक मामले में विशिष्ट आरोप के बिना व्यापक तरीके से नहीं फंसाया जा सकता है। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा कि वैवाहिक विवादों में भावनाएं चरम पर होती हैं और परिवार के अन्य सदस्यों को फंसाने की प्रवृत्ति हो सकती है जो शिकायतकर्ता के बचाव में नहीं आते हैं या उत्पीड़न की किसी भी कथित घटना के मूकदर्शक बने रहते हैं।
तेलंगाना हाई कोर्ट ने मुख्य आरोपी की मौसी और चचेरे भाई के खिलाफ कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि परिवार के सदस्यों को जिम्मेदार ठहराए गए विशिष्ट कृत्यों के बिना इसे आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता। जब गुस्सा बढ़ जाता है और रिश्ते कड़वे हो जाते हैं, तो आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की प्रवृत्ति भी होती है, जिसका मतलब यह नहीं है कि ऐसे घरेलू विवादों को आपराधिकता का रंग दे दिया जाना चाहिए।