By एकता | Jun 11, 2026
इन दिनों सोशल मीडिया पर '370 रुपये की बिरयानी' को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है। शायद ही किसी ने सोचा होगा कि चिकन बिरयानी की एक प्लेट पर खर्च किए गए 370 रुपये रिश्तों, सहमति और अधिकार जैसे गंभीर मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर की चर्चा का कारण बन जाएंगे।
कॉमेडियन प्रणीत मोरे के एक स्टैंड-अप शो का क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में शो में मौजूद एक युवक अपनी डेट का अनुभव साझा करते हुए बताता है कि उसने एक लड़की की चिकन बिरयानी पर 370 रुपये खर्च किए थे और बाद में उसने उससे 'कुछ' लेकर उसका हर्जाना वसूल कर लिया। यहां 'कुछ' का इशारा किस और अन्य शारीरिक नजदीकियों की ओर था।
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। बड़ी संख्या में लोगों ने युवक और कॉमेडियन दोनों की आलोचना की, जबकि कुछ लोगों ने इसे आधुनिक डेटिंग संस्कृति की कड़वी सच्चाई बताने की कोशिश की।
हालांकि, अगर गहराई से देखा जाए तो यह सोच न तो नई है और न ही सिर्फ मॉडर्न डेटिंग का हिस्सा है। लंबे समय से समाज में एक वर्ग ऐसा रहा है, जिसे लगता है कि किसी महिला पर पैसा खर्च करने से उसे बदले में कुछ पाने का अधिकार मिल जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि आज सोशल मीडिया के दौर में ऐसी मानसिकता खुलकर सामने आ रही है और महिलाएं भी उसका जवाब देने के लिए पहले से कहीं ज्यादा मुखर हैं।
इस विवाद का केंद्र बिरयानी की कीमत नहीं है, बल्कि वह सोच है जो रिश्तों को लेन-देन में बदल देती है। सवाल यह है कि क्या डेट पर खर्च किया गया पैसा किसी व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा, सम्मान और सहमति से बड़ा हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि जब लोग डेटिंग को भावनात्मक जुड़ाव के बजाय एक सौदे की तरह देखने लगते हैं, तब समस्याएं पैदा होती हैं।
एक्सपर्ट के अनुसार, किसी डेट पर पैसा खर्च करके बदले में प्यार, ध्यान या शारीरिक नजदीकी की उम्मीद करना कोई मानसिक बीमारी नहीं है। यह व्यक्ति की परवरिश, सामाजिक सोच और रिश्तों को देखने के उसके नजरिए को दर्शाता है।
उनके मुताबिक, ऐसी सोच रखने वाले लोगों में अक्सर भावनात्मक परिपक्वता और दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता यानी एम्पैथी की कमी देखी जाती है। सोशल मीडिया और कुछ ऑनलाइन समुदाय भी कई बार युवाओं के भीतर रिश्तों को लेकर गलत धारणाएं पैदा कर देते हैं।
एक्सपर्ट के अनुसार, जब कोई व्यक्ति डेटिंग को एक बिजनेस डील की तरह देखने लगता है, तो रिश्ता सम्मान और सहमति की जगह लाभ और नुकसान के गणित में बदल जाता है। ऐसे लोग अक्सर रिश्तों में एक अदृश्य स्कोरकार्ड रखते हैं। उनके मन में यह हिसाब चलता रहता है कि उन्होंने कितना पैसा खर्च किया, कितने गिफ्ट दिए या सामने वाले के लिए क्या-क्या किया। बदले में वे किसी न किसी रूप में 'रिटर्न' की उम्मीद करते हैं।
इस तरह के रिश्तों में प्यार और अपनापन नहीं, बल्कि शर्तें और अपेक्षाएं हावी होती हैं। सामने वाले की परवाह भी अक्सर तभी की जाती है, जब उससे कोई व्यक्तिगत लाभ मिलने की संभावना हो।
एक्सपर्ट के अनुसार, ऐसे लोगों की पहचान कुछ स्पष्ट संकेतों से की जा सकती है। सबसे बड़ा रेड फ्लैग यह है कि व्यक्ति आपकी भावनाओं, व्यक्तित्व या पसंद-नापसंद में कम दिलचस्पी दिखाता है, लेकिन इस बात पर ज्यादा ध्यान देता है कि आप उसके लिए क्या कर सकते हैं। वह रिश्ते को साझेदारी नहीं, बल्कि निवेश और मुनाफे के नजरिए से देखता है।
समय के साथ ऐसे संबंध घुटन पैदा करने लगते हैं, क्योंकि उनमें भावनात्मक सुरक्षा और सम्मान की कमी होती है। इसके विपरीत, एक स्वस्थ रिश्ता बिना किसी शर्त के आपसी सम्मान, विश्वास, देखभाल और वास्तविक जुड़ाव पर आधारित होता है।
इस पूरे विवाद ने सोशल मीडिया की दोहरी भूमिका को भी उजागर किया है। एक ओर, सोशल मीडिया ने सहमति, जेंडर रोल्स और रिश्तों में सम्मान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर चर्चा करने का अवसर दिया है। दूसरी ओर, यही प्लेटफॉर्म कई बार लोगों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने और ट्रोलिंग का माध्यम भी बन जाता है।
एक्सपर्ट ने चेतावनी दी कि किसी की गलती को लेकर लगातार ऑनलाइन बेइज्जती या ऑनलाइन शेमिंग करना युवाओं में एंग्जायटी, तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। गलत सोच का विरोध जरूरी है, लेकिन किसी को सीखने और बदलने का अवसर देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डेट कोई बिजनेस कॉन्ट्रैक्ट नहीं होती और न ही गिफ्ट किसी सौदे का हिस्सा होते हैं। किसी रिश्ते में समय, पैसा, भावनाएं या प्रयास लगाने का मतलब यह नहीं कि आपको सामने वाले पर नियंत्रण या अधिकार मिल गया।
किसी भी रिश्ते की सबसे महत्वपूर्ण शर्त सहमति है। और सहमति कभी खरीदी नहीं जा सकती। यह हमेशा स्वेच्छा से दी जाती है, दबाव में नहीं। इतना ही नहीं, किसी भी व्यक्ति को अपनी सहमति वापस लेने का भी पूरा अधिकार होता है।