साहित्य का धर्म पुस्तक साहित्य जगत के वातावरण को बदलने के लिए प्रेरित करती है: पवनपुत्र बादल

By प्रेस विज्ञप्ति | Mar 30, 2026

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् द्वारा रविवार को प्रवासी भवन, नई दिल्ली में श्रीधर पराड़कर कृत साहित्य का धर्म पुस्तक पर गोष्ठी आयोजित की गई। यह गोष्ठी अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. महामंत्री पवनपुत्र बादल के सान्निध्य एवं शोधार्थी वरुण कुमार के संचालन में संपन्न हुई।

साहित्य परिक्रमा के संपादक इन्दुशेखर तत्पुरुष ने कहा कि यह पुस्तक शास्त्रीय विवचन नहीं अपितु साहित्य का लोकपक्ष और समसामयिक चित्रण प्रस्तुत करती है। लेखक ने साहित्य की नैतिकता और लेखकीय उत्तरदायित्व पर गंभीरता से विचार किया है। 

इस गोष्ठी में सुधित मिश्रा, सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा, अजीत कुमार, राजीव रंजन, पुष्पा सिन्हा, नवीन कुमार नीरज, विदु कालरा एवं अंकित कुमार दुबे ने अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक भारतीय जीवन दृष्टि का गहराई से अध्ययन प्रस्तुत करती है। साहित्य में जीवन के सकारात्मक पक्ष को फिर से समाहित करने पर बल देती है। भारतीय भाषाओं को प्रतिष्ठित करने की बात कहती है। पूर्वज साहित्यकारों ने जो विरासत छोड़ी है, उसे आगे बढ़ाने पर जोर देती है। इस पुस्तक में साहित्य की परिभाषा, साहित्य का सामर्थ्य, भारतीय ज्ञान परंपरा, युगधर्म  एवं साहित्य की चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया है। इसमें स्व जागरण पर विचार प्रस्तुत किया गया है। इस पुस्तक में गीता की तरह अठारह अध्याय है। यह पुस्तक, आज जो साहित्यकार भटक गए हैं, उन्हें सजगता का उपदेश देती है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के अ.भा. सह कोषाध्यक्ष कमलाकान्त गर्ग, कार्यालय सचिव संजीव सिन्हा, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के संयुक्त महामंत्री बृजेश कुमार गर्ग सहित कई साहित्य‌कार एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

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