Emergency In India 1975 | आपातकाल वह काला दौर था, जिसमें भारतीय लोकतंत्र को निर्ममता से कुचल दिया गया था : PM मोदी

By रेनू तिवारी | Jun 25, 2026

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 जून को भारतीय इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक—1975 के आपातकाल—को याद करते हुए इसे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा हमला करार दिया। सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए गए अपने संदेशों में प्रधानमंत्री ने उन अनगिनत नागरिकों और विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने उस दौर में दमन के खिलाफ आवाज़ उठाई और भारतीय संविधान के आदर्शों की रक्षा की।

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, 1975 में इसी दिन लागू किए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा हमला था। इस दौरान नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया तथा हमारे लोकतंत्र की आधारशिला माने जाने वाले संस्थानों पर प्रहार किया गया।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि देशवासियों के लिए संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराते हैं।

संविधान की भावना से प्रेरित होकर हम ऐसे भारत का निर्माण करेंगे, जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के प्रति सदैव प्रतिबद्ध रहेगा।” भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू रहा था। वर्ष 2025 से केंद्र सरकार इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मना रही है। इस संबंध में जारी राजपत्र अधिसूचना में कहा गया था कि 25 जून 1975 को आपातकाल घोषित किया गया, जिसके बाद “तत्कालीन सरकार द्वारा सत्ता का दुरुपयोग किया गया और भारत की जनता को ज्यादतियों तथा अत्याचारों का सामना करना पड़ा।”

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक अन्य पोस्ट में कहा कि ‘‘संविधान हत्या दिवस’’ आज हमें उस काले दौर की याद दिला रहा है, जब भारतीय लोकतंत्र को बुरी तरह से कुचला गया था। उन्होंने पोस्ट में कहा, “यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने को प्रेरित करता है। आपातकाल का विरोध करने वाली सभी विभूतियों को सादर नमन।’’ आपातकाल की औपचारिक घोषणा भारतीय संवैधानिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।

इसके साथ ही कार्यपालिका को व्यापक और सर्वोच्च शक्तियां प्राप्त हो गईं तथा राज्यों पर केंद्र का नियंत्रण और अधिक मजबूत हो गया। आपातकाल लागू होने के बाद संवैधानिक सुरक्षा उपायों को क्रमबद्ध तरीके से निलंबित कर दिया गया। आपातकाल के दौरान संस्थागत प्रणालियों और प्रशासनिक आदेशों के माध्यम से प्रेस तथा जनसूचना पर कड़ा नियंत्रण रखा गया।

इस अवधि में संसद ने कई संविधान संशोधन पारित किए, जिनसे न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं के नियंत्रण एवं संतुलन की व्यवस्था कमजोर हुई। आपातकाल के सबसे विवादास्पद पहलुओं में से एक जबरन नसबंदी अभियान था। सामान्य चुनावों से उत्पन्न राजनीतिक बदलाव के बाद मार्च 1977 में आपातकाल औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया।

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