Iran-Israel-US जंग और भड़की, मिसाइलों की बारिश के बीच तेल संकट बढ़ा, हूती भी कूदे मैदान में

By नीरज कुमार दुबे | Mar 28, 2026

एक तरफ ईरान बनाम अमेरिका और इजराइल का टकराव खुली जंग में बदलता दिख रहा है, तो दूसरी तरफ भारत अपनी रक्षा क्षमता को तेजी से धार देने में जुट गया है। यह केवल खबर नहीं है, बल्कि आने वाले समय की भू राजनीतिक दिशा तय करने वाला निर्णायक मोड़ है।

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उधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो की भूमिका पर खुलकर नाराजगी जताई और उसे कागजी बाघ तक कह डाला। इससे यह साफ हो गया कि पश्चिमी गठबंधन भी इस युद्ध में बिखराव का शिकार है। वहीं अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जमीनी सेना उतारे बिना युद्ध जीतने का दावा किया है जो यह दिखाता है कि अमेरिका तकनीकी और हवाई हमलों के जरिए निर्णायक बढ़त चाहता है।

दूसरी ओर, ईरान ने इजराइल के हमलों को खुली आक्रामकता बताते हुए कड़ी चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा है कि नागरिक परमाणु ठिकानों और औद्योगिक ढांचे पर हमला किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है और इसका भारी मूल्य चुकाना पड़ेगा। ईरान ने दुबई में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा कर यह संदेश दे दिया कि वह अब जवाबी कार्रवाई से पीछे हटने वाला नहीं है।

देखा जाये तो इस युद्ध का सबसे खतरनाक पहलू इसका तेजी से फैलना है। सऊदी अरब के एयरबेस पर हमले में अमेरिकी सैनिक घायल हुए, यूएई में मिसाइल हमलों से आग लग गई, ओमान के बंदरगाह पर ड्रोन हमला हुआ और जॉर्डन के सैन्य ठिकाने भी निशाने पर आए। वहीं लेबनान में इजराइली हमलों से हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यानी पूरा क्षेत्र युद्ध की चपेट में है।

ऊर्जा सुरक्षा पर इसका सीधा असर पड़ा है। कुवैत के तेल की कीमत 118 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है, लगभग ठप स्थिति में है। अगर यह रास्ता पूरी तरह बंद हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल सकती है।

उधर, ईरान की रणनीति अब केवल सैन्य नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक भी हो गई है। छोटे छोटे अंतराल में मिसाइल हमले कर इजराइल को लगातार परेशान करना उसकी नई चाल है। इससे नागरिकों पर दबाव बढ़ता है और युद्ध का मानसिक असर गहरा होता है।

इस बीच, पाकिस्तान ने सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की के साथ वार्ता की मेजबानी का ऐलान कर खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय शक्तियां भी इस संघर्ष को नियंत्रित करने की कोशिश में हैं, लेकिन जमीन पर हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।

स्पष्ट है कि यह युद्ध केवल ईरान और इजराइल के बीच नहीं रहा। यह अमेरिका, खाड़ी देश, यमन, इराक और पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले चुका है। इसका सामरिक महत्व बेहद बड़ा है क्योंकि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन को सीधे प्रभावित कर रहा है।

दूसरी ओर, ऐसे विस्फोटक वैश्विक माहौल में भारत ने अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 2.38 लाख करोड़ रुपये की भारी भरकम खरीद को मंजूरी देकर साफ कर दिया है कि भारत अब निर्णायक शक्ति बनने की तैयारी में है। हम आपको बता दें कि थल सेना के लिए वायु रक्षा प्रणाली, टैंक भेदी गोला बारूद, धनुष तोप और उन्नत संचार प्रणाली को मंजूरी मिली है। यह सीधे युद्धक्षेत्र की मारक क्षमता और प्रतिक्रिया समय को बेहतर बनाएगा। वायु सेना के लिए मध्यम परिवहन विमान, लंबी दूरी की मिसाइल प्रणाली और ड्रोन आधारित हमलावर प्लेटफार्म शामिल हैं, जो भविष्य के युद्धों में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

साथ ही नौसैनिक और तटीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तटरक्षक बल को तेज गति वाले प्लेटफार्म दिए जाएंगे। यह समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब वैश्विक समुद्री मार्ग खतरे में हैं। इस पूरी खरीद का रणनीतिक निहितार्थ साफ है कि भारत अब आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम सैन्य शक्ति बनना चाहता है। बदलते वैश्विक समीकरणों में यह कदम भारत को न केवल सुरक्षित करेगा बल्कि उसे क्षेत्रीय शक्ति से वैश्विक प्रभावशाली राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगा।

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