मंडी शिवरात्रि में 81 मंदिरों के 200 से अधिक देवी देवताओं की उपस्थिति रहती है

By विजयेन्दर शर्मा | Mar 01, 2022

मंडी।  शिवरात्रि मेला हर वर्ष हिमाचल प्रदेश के मंडी शहर में शिवरात्रि के हिंदू त्यौहार से शुरू होने वाले 7 दिनों के लिए आयोजित एक वार्षिक प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय मेला है।त्यौहार की लोकप्रियता व्यापक है और इसलिए इसे अंतरराष्ट्रीय त्यौहार के रूप में जाना जाता है। अपने 81 मंदिरों से त्योहार में आमंत्रित देवताओं और देवियों की बड़ी संख्या को ध्यान में रखते हुए मंडी शहर को ‘पहाड़ियों की वाराणसी’ का खिताब मिला है ।अंतरराष्‍ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्‍सव मंडी कई महत्वपूर्ण परंपराएं हैं।

इसे भी पढ़ें: देव आस्था का महा समागम --बड़ादेव के शुभ आगमन के साथ मंडी में शुरू हुए शिवरात्रि मेले के कारज

वैसे तो प्रत्येक माह में एक शिवरात्रि होती है, लेकिन फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली इस शिवरात्रि का अत्यंत महत्व है, इसलिए इसे शिवरात्रि  कहा जाता है। वास्तव में शिवरात्रि भगवान भोलेनाथ की आराधना का ही पर्व है, जब धर्मप्रेमी लोग महादेव का विधि-विधान के साथ पूजन अर्चन करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस दिन शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जो शिव के दर्शन-पूजन कर खुद को सौभाग्यशाली मानती है।शिव भगवान को मंडी का अधिष्ठाता देव माना जाता रहा है। आधुनिक मंडी शहर की स्थापना बाबा भूतनाथ मंदिर के साथ ही हुई है।

इसे भी पढ़ें: सीएम करेंगे अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ

अंतराष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि महोेत्सव की शुरुआत में भूतनाथ मंदिर में उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। भूतनाथ मंदिर की स्थापना मंडी नगर की स्थापना करने वाले राजा अजबर सेन के शासनकाल के दौरान की गई।आज मंडी में जहां पर भूतनाथ मंदिर बना हुआ है, वहां पर किसी जमाने में गायों के चरने के लिए चरागाह हुआ करती थी। वहां एक किसान गाय चराने आया करता था। उसने पाया कि उसकी गाय दूध नहीं दे रही जिस कारण उसने उसकी निगरानी शुरू कर दी। निगरानी के बाद उसने आश्चर्यजनक घटना देखी कि गाय जमीन के किसी खास स्थान पर जाकर दूध जमीन पर गिरा दे रही है। बात फैलने के बाद राजा अजबरसेन को घटना के बारे में जानकारी प्राप्त हुईं। इसी दौरान राजा को स्वप्न हो गया कि उस स्थान पर शिवलिंग है जिस कारण गाय वहां अपना दूध उस स्थान पर गिरा रही है। राजा ने चरागाह के उस स्थान की खुदाई करवायी तो स्वंयभू प्रकट हो गया। अजबर सेन ने उसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कर दी। इसके बाद इस स्थान पर शिव भगवान का बहुत ही भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। राजा अपनी राजधानी पुरानी मंडी के बटोहली से ब्यास नदी के पास ले आए।

प्रमुख खबरें

SIR पर Election Commission के कदम नाकाफी, Congress ने उठाए सवाल

NSE प्रमुख Ashish Chauhan बोले नए UPI Merchant Tax पर सरकार से नहीं हुई कोई बातचीत

Congress 29 सितंबर को Delhi में करेगी Dalit Adivasi Swabhiman Baithak

पारिवारिक मामलों में अदालती फैसले थोपे हुए लगते हैं: Supreme Court जस्टिस NV Anjaria