By संतोष उत्सुक | May 07, 2025
लम्बी, चौड़ी और महान सड़क पर सफ़र करना किस्मत की बात है। वहां जाकर तो शानदार गाड़ियों को भी मज़ा आता होगा। छोटे शहर या गांव में रहने वाला, छोटी गाड़ी का मालिक आम आदमी भी कभी न कभी उस सड़क से यात्रा करता है तो उसे लगता है यह शानबढ़ाऊ राजमार्ग उसके कल्याण के लिए भी बना है। प्रशासन चाहता है कि आम आदमी भी इस खास सड़क पर आकर गर्व महसूस करे। छोटी मोटी कमियां जो इसके निर्माण के दौरान रह गई हैं उनका बुरा न माने। आम आदमी कभी बुरा भी नहीं मानता। वास्तव में उसे बुरा मानने का अधिकार है भी नहीं। गलती से बुरा मान भी ले तो चाहकर भी कुछ नहीं कर सकता।
सड़क बनवाने वालों का काम लम्बी, चौड़ी और महान सड़क बनाना है। उनका काम संभावित घायलों के इलाज के लिए कोई कारगर योजना बनाना नहीं है। अगर नीति निर्माताओं ने ऐसी कोई योजना बना ही दी है तो उसमें कई तरह के लोचे होना ज़रूरी है। ऐसा होना हमारी कार्यसंस्कृति का अहम् हिस्सा है जिसे परम्परा मानकर निभाना पड़ता है। सड़क बनाने का कार्य देश के विकास से जुड़ा है लेकिन सड़कों के आसपास, आम लोगों के लिए ज़रूरी सुविधाएं विकसित करवाना, सुविधाएं उपलब्ध हो चुकी हैं तो उन्हें साफ़ सुथरा रखना, कुछ टूट गया है तो उसकी मरम्मत करवाना किसी की भी ज़िम्मेदारी नहीं है। वास्तव में यह ज़िम्मेदारी उन सुविधाओं में पहले से ही सम्मिलित होनी चाहिए कि अपना ध्यान खुद रखें। ज़रूरत पड़े तो अपनी मरम्मत खुद कर लें। वहां एक सूचना भी लिखी हो सकती है कि यह सिर्फ देखने के लिए है यात्रियों को चाहिए कि वे इनका प्रयोग न करें।
इन घटनाओं से बचने का एक ही तरीका है कि आम आदमी, लम्बी चौड़ी सड़क पर यात्रा करने का महान विचार ही स्थगित रखे।
- संतोष उत्सुक