तृण तृण बिखरती तृणमूल

By मृत्युंजय दीक्षित | Jun 13, 2026

जब 4 मई 2026 को बंगाल जनता ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल सरकार की विदाई का जनादेश सुनाया तब किसी ने भी सपने नहीं सोचा था कि इस हार के बाद तृणमूल कांग्रेस तृण तृण होकर बिखरने लगेगी। बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 80 विधायक जीतकर आए थे जिनमें से पहले 58 विधायक अलग हुए फिर उनकी संख्या बढ़कर 64 हो गई, नेता प्रतिपक्ष भी उन्होंने अपने मन का बना लिया। लोकसभा में 19 सांसदों  ने बागी होकर अलग गुट बना लिया है, बागियों की संख्या आगे भी बढ़ सकती है। राज्यसभा सांसदों के त्यागपत्र  भी आ रहे हैं। राज्यसभा सांसद सुखेदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव तथा प्रकाश चिक बराईक इस्तीफा दे चुके हैं। आश्चर्यजनक रूप से ममता के सबसे करीबी कल्याण बनर्जी भी बगावती तेवर दिखा रहे हैं। जिला और पंचायत स्तर पर भी पार्टी की यही स्थिति है।

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आज जो सांसद बगावती तेवर अपना रहे हैं उनमें से दस पहली बार चुनकर आए हैं। ये तृणमूल नेताओं की वो पीढ़ी है जिसे ममता बनर्जी ने बीजेपी के खिलाफ लड़ाई का नया चेहरा बनाकर आगे बढ़ाया था। अब यही लोग अपना भविष्य सुधारने के लिए ममता दीदी के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, क्योंकि ये जानते हैं बंगाल में सत्ता में आई पार्टियाँ कम से कम डेढ़-दो दशक सता में रहती हैं, इस तरह आने वाले 15-20 वर्षों तक इनका कोई भविष्य नहीं होगा। 

तृणमूल नेताओं के प्रति जनता के गुस्से का आलम ये है कि चुनाव में पार्टी को धूल चटाने के बाद भी उसका मन नहीं भरा है। आए दिन तृणमूल नेताओं की सड़कों पिटाई की जा रही है। तृणमूल नेता जहां भी जाते हैं जनता उन्हें चोर-चोर कहकर पुकारती है और उन पर टमाटर-अंडे फेंकती है। अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी जैसे नेताओ तक पर अंडे टमाटर फेंके जा चुके हैं और पिटाई हो चुकी है। यह भी संभव कि  बंगाल की जनता में व्याप्त इस भयंकर आक्रोश से बचने के लिए भी तृणमूल नेता बगावती हो रहे हों। 

तृणमूल के जिला स्तरीय नामचीन नेता इस्तीफा दे रहे हैं। कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम, चंदन नगर के मेयर राम चक्रवर्ती, बिधान नगर के मेयर कृष्णा चक्रवर्ती और कटवा म्युनिसिपलिटी चेयरमैन कमलकांता चक्रवर्ती ने सौ से अधिक पार्षदों सहित इस्तीफा दे दिया है। राज्यभर से तृणमूल से लगातार इस्तीफों व बगावत के समाचार आ रहे हैं। हुगली, नादिया, मुर्शिदाबाद और उत्तर व दक्षिण -24 परगना जैसे गढ़ों में प्रतिदिन पंचायत सदस्यों  के पाला बदलने की ख़बरें आ रही हैं। टीएमसी में बगावत व इस्तीफों के बाद कोलकाता नगर निगम ही भंग कर दिया गया है।  

बंगाल में यह भी दावा किया जा रहा है कि इनमें से बहुत से लोग जेल जाने से बचने के लिए यह तरीका अपना रहे हैं। अभिषेक बनर्जी के डायमंड हार्बर मॉडल का कुख्यात चेहरा और चुनावों के दौरान अपने आप को पुष्पा कहने वाला फाल्टा विधानसभा चुनाव का उम्मीदवार जहाँगीर खां के जेल जाने से अफरा तफरी का माहौल है। तृणमूल नेताओं के पाप जैसे उतरा रहे हैं। बंगाल पुलिस को संदेशखाली के तालाब से बड़ी मात्रा में हथियार मिले हैं, एक खेत से करोड़ों का कैश और हथियार मिले हैं। बमों व अन्य हथियारों की फैक्ट्रियां मिल रही हैं। हजारों की संख्या में सफ़ेद साड़ियाँ मिली हैं जो तृणमूल ने चार मई के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं की विधवाओं को देने के लिए रखी थीं यदि गलती से भी तृणमूल जीत जाती तो यही लोग जो आज इस्तीफा देकर भाग रहे हैं भाजपा कार्यकर्ताओं के नर संहार का नेतृत्व करते। 

अपराधों की जो फेहरिस्त है उसे देखकर लगता है कि ममता दीदी और उनके चाटुकारों का शेष जीवन अब कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाने या फिर जेल में ही बीतने वाला है। एक समय वाराणसी लोकसभा से पीएम नरेंद्र मोदी को हराने और दिल्ली आकर इंडी गठबंधन का नेतृत्व करने  वाली ममता दीदी के लिए अपनी पार्टी का अस्तित्व बचा कर रखना भी मुश्किल हो चुका है।

- मृत्युंजय दीक्षित 

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