By अभिनय आकाश | Mar 24, 2026
मिडिल ईस्ट में जंग की आग अब सिर्फ गोलियों और बता दें कि मिसाइलों तक सीमित नहीं रही है। अब बता दें कि इस युद्ध में एक ऐसे देश की एंट्री हो रही है जो खुद बहुत ही ज्यादा आर्थिक संकट से जूझ रहा है। लेकिन फिर भी चौधरी बनने की जो कोशिश है वो लगातार यहां पर सामने आ रही है। पाकिस्तान से अब एक ऐसी कूटनीतिक चाल चली जा रही है जो इस पूरे युद्ध का यानी कि मिडिल ईस्ट के युद्ध का रुख बदल सकती है या फिर कहें तो इसे और भी ज्यादा खतरनाक भी बना सकती है। दरअसल बता दें कि ट्रंप ने अचानक एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। ईरान पर हमलों को 5 दिनों के लिए रोक दिया गया है और इसके बाद पर्दे के पीछे की कहानी शुरू हो गई है। यानी कि डिप्लोमेसी की सबसे खतरनाक बाजी शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब इस्लामाबाद को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का केंद्र बनाया जाया जा सकता है। सूत्र यह बता रहे हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधी नहीं बल्कि बैक चैनल बातचीत चल रही है और इसमें पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्की और खाड़ी देश जो हैं वो भी मौजूद है जो मैसेज कैरियर का यहां पर काम कर रहे हैं और इस संभावित बातचीत में शामिल हो सकते हैं अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और इसी के साथ ही बता दें कि अमेरिका के विशेष दूत वहीं ईरान की बात करें तो ईरान की तरफ से राष्ट्रपति का नाम सामने आया है। यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिरकार क्यों आर्थिक रूप से कमजोर और कर्ज में डूबा पाकिस्तान इस युद्ध में मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा है?
दुनिया की लगभग 20% तेल सप्लाई यहीं से गुजरती है। ईरान ने इस रास्ते को लगभग बंद ही कर दिया है और यहां पर बिल्कुल यह साफ कर दिया है कि जब तक हमले नहीं रुकेंगे तब तक रास्ता नहीं खुलेगा। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स लगातार हमले कर रही है। वहीं बता दें कि नेतन याू ने भी यहां पर साफ यह कहा है कि सैन्य कारवाई जारी रहेगी। मतलब एक बात बिल्कुल साफ है। ऊपर बातचीत का ढोंग जरूर चल रहा है लेकिन नीचे युद्ध भी है। तो सवाल अब भी यही है कि क्या पाकिस्तान सच में शांति का रास्ता बना रहा है या फिर यह एक सोची समझी चाल है जो इस युद्ध को और भी ज्यादा खतरनाक बना सकती है।