राज्यसभा में Harivansh पर फिर भरोसा, PM Modi बोले- यह आपकी सहज कार्यशैली का सम्मान है

By अंकित सिंह | Apr 17, 2026

शुक्रवार को विपक्ष द्वारा कोई उम्मीदवार न उतारे जाने के कारण हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति निर्विरोध निर्वाचित हो गए। यह लगातार तीसरी बार है जब हरिवंश इस पद पर चुने गए हैं। हरिवंश का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त होने के बाद यह पद रिक्त हो गया था। राज्यसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सी पी राधाकृष्णन ने कार्य प्रक्रिया एवं संचालन नियमों के नियम 7 के तहत शुक्रवार को चुनाव की तिथि निर्धारित की थी। प्रस्तावों की सूचना प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि गुरुवार दोपहर 12 बजे थी।

मोदी ने कहा कि सदन की ओर से, मेरी तरफ से मैं श्रीमान हरिवंश जी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं। राज्यसभा उप सभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना, ये अपने आप में इस सदन का जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड मआपके अनुभव का सदन को जो लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है, उसपर एक प्रकार से सदन ने आज एक मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि ये एक अनुभव और सहज कार्यशैली का सम्मान है और एक सहज कार्यशैली की स्वीकृति भी है।

मोदी ने कहा कि हम सबने हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए भी देखा है और मैं कह सकता हूं कि केवल सदन की कार्यवाही का संचालन ही नहीं, वे अपने जीवन के भूतकाल के अनुभवों का भी बहुत ही सटीक तरीके से सदन को समृद्ध करने में उपयोग करते हैं। उनका ये अनुभव पूरी कार्यवाही को, संचालन को और सदन के माहौल को और अधिक परिपक्व बनाता है। मुझे विश्वास है कि उप सभापति जी का नया कार्यकाल उसी भावना, संतुलन और समर्पण के साथ आगे बढ़ेगा और हम सबके प्रयासों से सदन की गरिमा को नई ऊंचाई प्राप्त होगी।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंश जी का जन्म जेपी के गांव में हुआ और सहज रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण वो अपने गांव के विकास के लिए विद्यार्थी काल से भी कुछ न कुछ करते और उनकी शिक्षा-दिक्षा काशी में हुई। 2018 में जब हरिवंश जी ने राज्यसभा के उप सभापति की भूमिका निभानी शुरू की, उसके बाद मेरी जानकारी के अनुसार इन्होंने colleges और universities में 350 से अधिक कार्यक्रम किए हैं। ये बहुत बड़ा काम है। हरिवंश जी की सदन की कुशलता को तो सभी ने भलीभांति देखा है। लेकिन, साथ-साथ उन्होंने राज्यों की विधानसभाएं और विधान परिषद के अधिकारियों की कैसे मदद की जाए और उनकी आवश्यक ट्रैनिंग के लिए भी उन्होंने काफी समय दिया है।

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