अमेरिकी वार्ताकार ने की पाक नेताओं से बातचीत, शांति वार्ता बहाल करने पर दिया जोर

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 30, 2019

इस्लामाबाद। अफगानिस्तान की सुलह प्रक्रिया से संबद्ध अमेरिका के प्रमुख वार्ताकार जलमी खलीलजाद ने पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत में उन आर्थिक और सुरक्षा लाभों का उल्लेख किया जो युद्धग्रस्त देश में शांति कायम करने पर क्षेत्र में हासिल हो सकते हैं। इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने बुधवार को यह जानकारी दी। खलीलजाद के दो दिवसीय पाकिस्तान दौरे का समापन मंगलवार को हुआ। खलीलजाद की पाकिस्तान यात्रा तालिबान के साथ थमी हुई शांति वार्ता को बहाल करने के हालिया प्रयत्नों का हिस्सा है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक आत्मघाती हमले के बाद सितंबर में यह वार्ता रद्द कर दी थी। काबुल में इस हमले में एक अमेरिकी सैनिक और 11 अन्य लोगों की जान चली गयी थी। तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। अमेरिकी दूतावास की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया कि खलीलजाद ने अपने दौरे में प्रधानमंत्री इमरान खान, सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने अफगान शांति प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति और देश में हिंसा कम करने के महत्व के बारे में चर्चा की।

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इसमें कहा गया कि उन्होंने उन आर्थिक और सुरक्षा लाभों का उल्लेख किया जो (अफगानिस्तान में) शांति कायम करने पर हासिल किए जा सकते हैं। इससे पहले, मंगलवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिका को अफगानिस्तान में शांति और सुलह प्रक्रिया के प्रति ‘दृढ़’ समर्थन का आश्वासन दिया था तथा युद्ध से जर्जर इस देश में वैमनस्य कम करने के लिए संघर्ष से जुड़े सभी पक्षों के द्वारा ‘व्यावहारिक’ कदम उठाने के महत्व पर जोर दिया था।

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खलीलजाद पाकिस्तान से पहले अफगानिस्तान गये थे जहां उन्होंने वहां के नेताओं को अफगान शांति प्रक्रिया के प्रति अपने नये प्रयासों से अवगत कराया था। ट्रंप द्वारा तालिबान के साथ अचानक वार्ता कर दिये जाने के बाद खलीलजाद की यह पहली अफगानिस्तान यात्रा थी। उससे पहले इस अमेरिका-तालिबान वार्ता के तहत कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और तालिबान के प्रतिनिधियों के बीच नौ दौर की बातचीत हुई थी लेकिन वह किसी नतीजे पर नहीं पहुंची थी। पिछले शुक्रवार को मास्को में पाकिस्तान, रूस, चीन और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी थी कि अफगानिस्तान में शांति के लिए वार्ता ही एकमात्र मार्ग है जिसमें अमेरिका और तालिबान के बीच सीधी वार्ता की बहाली भी शामिल है।

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