NATO चीफ से ऐसी क्या हुई बात? Greenland पर अमेरिका का U-टर्न, टैरिफ धमकी से हटे पीछे

By अभिनय आकाश | Jan 22, 2026

ग्रीनलैंड का समर्थन करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी से पीछे हटने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ग्रीनलैंड के संबंध में भविष्य के समझौते का खाका तैयार हो गया है। स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर अपने भाषण के बाद ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्होंने और नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे ने ग्रीनलैंड और वास्तव में पूरे आर्कटिक क्षेत्र के संबंध में भविष्य के समझौते का ढांचा तैयार कर लिया है। उन्होंने आगे कहा कि वे 1 फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ नहीं लगाएंगे। ट्रम्प ने कहा कि ग्रीनलैंड से संबंधित गोल्डन डोम परियोजना पर अतिरिक्त चर्चा चल रही है और बातचीत जारी रहने पर और अधिक जानकारी सामने आएगी। उन्होंने कहा कि नाटो के महासचिव मार्क रुट्टे के साथ हुई मेरी बेहद सार्थक बैठक के आधार पर हमने ग्रीनलैंड और वास्तव में पूरे आर्कटिक क्षेत्र के संबंध में भविष्य के समझौते की रूपरेखा तैयार कर ली है। यदि यह समझौता हो जाता है, तो यह संयुक्त राज्य अमेरिका और सभी नाटो देशों के लिए बहुत फायदेमंद होगा। इसी समझ के आधार पर मैं 1 फरवरी से लागू होने वाले टैरिफ नहीं लगाऊंगा। ग्रीनलैंड से संबंधित गोल्डन डोम परियोजना पर आगे चर्चा चल रही है।

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ग्रीनलैंड को बर्फ का एक टुकड़ा बताते हुए, ट्रम्प ने कहा कि हमें इसकी पूर्ण ऑनरशिप चाहिए। आप लीज पर इसकी रक्षा नहीं कर सकते। हमारे प्रस्तावों पर देश हां और ना कह सकते हैं लेकिन अमेरिका आपके रिस्पॉन्स को याद रखेगा। ट्रंप तर्क दिया कि इसके रणनीतिक महत्व के मुकाबले इस क्षेत्र पर नियंत्रण की मांग नगण्य है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सैन्य और रसद क्षमता केवल संयुक्त राज्य अमेरिका के पास है। उन्होंने कहा कि हम अब बहुत बड़ी मिलिट्री पावर हैं। मैं मिलिट्री का इस्तेमाल नहीं करना चाहता और ना ही करन चाहूंगा। लेकिन हम फिर भी ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए मिलिट्री का इस्तेमाल कर सकते हैं। हमें हमारी सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है। ट्रम्प की टिप्पणियों ने एक बार फिर ग्रीनलैंड के भू-राजनीतिक महत्व की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया। 

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ग्रीनलैंड का महत्व उसकी लोकेशन में निहित है। ग्रीनलैंड जो है वो आर्कटिक रीजन के आठ देशों में से एक है। ऐसे तो यह डेनमार्क का हिस्सा है लेकिन ऑटोनॉमस टेरिटरी है यानी स्वायत्त क्षेत्र। इसका 80% हिस्सा बर्फ से ढका है और बर्फ की भी 4 किमी मोटी परत है। लेकिन अब यह पिघल रही है। आर्कटिक रीजन बाकी दुनिया के मुकाबले चार गुना रफ्तार से तप रहा है। करीब 26 लाख स्क्वायर किमी बर्फ गायब हो चुकी है। डाटा के मुताबिक इसी बर्फ के नीचे दुनिया की 30% अनएक्सप्लोर्ड गैस और 13% अनएक्स्लोर्ड ऑयल यह छुपे हुए हैं। इसके अलावा यहां कीमती धातुएं सोना, प्लैटिनम, जस्ता और लौ, अयस्क, तांबा, सीसा, मोलिब्डेनम और टाइटेनियम यह सब भी मौजूद बताए जाते हैं। इन सब वजहों से इस आइलैंड पर ट्रंप ही नहीं रूस और चीन की भी नजर बनी रहती है। 

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