हाथों को थोड़ा राउंड घुमाके, आंखों पर नीला चश्मा चढ़ाकर, मैक्रों ने ट्रंप को समझाई बर्दाश्त की हद, ग्रीनलैंड में अब होगा यूरोपियन देशों का वॉर एक्सरसाइज?

मैक्रों ट्रंप की तरह नाम तो नहीं ले रहे हैं लेकिन निशाने पर वो ट्रंप और अमेरिका को ही रख रहे हैं। उन्होंने दावोस में इकोनॉमिक फोरम पर साफ तौर पर यह कहा कि अब जरूरी यह है कि यूरोप अपने सम्मान को बचाए और जो लोग एक तरह से वर्ल्ड ऑर्डर चेंज करने की कोशिश कर रहे हैं और जिस तरह से यूरोप को अपमानित किया जा रहा है उसके खिलाफ उचित कदम उठाया जाना चाहिए।
क्या अमेरिका का राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पूरी तरह से अब दादागिरी और हिटलर शाही पर उतर आए हैं? अब तो हदें पार कर रहे हैं। अमेरिका और फ्रांस के बीच तक अब जंग जैसे हालात बन रहे हैं। और उधर पूरे नाटो और पूरे यूरोप से तो जंग के हालात लगातार बना ही रहे हैं। अपनी जिद के आगे ट्रंप किसी की सुनने को तैयार नहीं है। यह बात तो जगजाहिर हो गई है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रो को पसंद नहीं करते। यही वजह है कि मंच कोई भी हो वो मैक्रो की बेइज्जती से पीछे नहीं हटते। कभी वो मैक्रो के कुर्सी से उतर जाने की बात कहते हैं तो कभी वो मैक्रो के पर्सनल व्हाट्सएप चैट को पब्लिक फोरम पर पोस्ट कर देते हैं। इस बात से अब मैक्रों नाराज हैं। मैक्रों ट्रंप की तरह नाम तो नहीं ले रहे हैं लेकिन निशाने पर वो ट्रंप और अमेरिका को ही रख रहे हैं। उन्होंने दावोस में इकोनॉमिक फोरम पर साफ तौर पर यह कहा कि अब जरूरी यह है कि यूरोप अपने सम्मान को बचाए और जो लोग एक तरह से वर्ल्ड ऑर्डर चेंज करने की कोशिश कर रहे हैं और जिस तरह से यूरोप को अपमानित किया जा रहा है उसके खिलाफ उचित कदम उठाया जाना चाहिए।
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मैक्रो ने साफ तौर पर अपने भाषण में जिस तरह से बुली शब्द का इस्तेमाल किया वह साफ तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ इशारा करता है। उन्होंने यह भी कहा है कि अब जहां जरूरत ताकत की हो वहां यूरोप ताकत से जवाब दे और जैसी स्थिति हो वैसे हालात पर वो काम करें। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुल्क संबंधी धमकियों के सामने यूरोपीय संघ (ईयू) को व्यापार समूह के दबाव विरोधी तंत्र का उपयोग करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) में अपने संबोधन में मैक्रों ने आक्रामक अमेरिकी व्यापार दबाव और नए शुल्क के अंतहीन संचय का विरोध किया। उन्होंने कहा कि दबाव विरोधी तंत्र एक शक्तिशाली साधन है और हमें आज के कठिन माहौल में इसका उपयोग करने में संकोच नहीं करना चाहिए।
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वही ग्रीनलैंड जिस पर कब्जे की ख्वाहिश ट्रंप रखते हैं और बार-बार यह कह रहे हैं कि आज नहीं तो कल हम ग्रीनलैंड पर अपना कब्जा कर ही लेंगे। उसे लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनबल मैक्रों का कहना है कि हमने यह तय किया है कि ग्रीनलैंड पर अब हम मिलिट्री एक्सरसाइज करेंगे और यह किसी और को धमकी नहीं होगी बल्कि यूरोपियन देशों की एकता के लिए होगी। ग्रीनलैंड एक नया क्षेत्र है जहां दोनों देशों के बीच टकराहट साफ तौर पर दिख रही है। वहीं गाज़ा पीस प्लान को लेकर भी दोनों देश एक दूसरे से टकरा चुके हैं। अब ऐसे में आने वाले दिनों में मैक्रो और ट्रंप की लड़ाई किस तरफ जाती है, यह देखना होगा। फिलहाल दोनों नेता एक दूसरे की धज्जियां उड़ाने में जुटे हुए हैं।
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस सप्ताह पेरिस में यूरोपीय नेताओं की एक आपात बैठक बुलाने का आह्वान किया है, जिसमें ग्रीनलैंड को हासिल करने की ट्रंप की कोशिशों और शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव पर चर्चा की जानी है। ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि वह इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने इसका एक कारण यह बताया कि मैक्रों अधिक समय तक अपने देश का नेतृत्व नहीं करेंगे। इससे पहले इस सप्ताह ट्रंप ने सोशल मीडिया पर मैक्रों और नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ हुए निजी संदेश भी साझा किए थे।
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