Asian Games ट्रायल में उतरेंगी विनेश फोगाट, Supreme Court ने कहा- Vinesh ने देश का नाम रोशन किया है

By नीरज कुमार दुबे | May 29, 2026

देश की चर्चित पहलवान और ओलंपियन विनेश फोगाट को 2026 एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति देने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश में उच्चतम न्यायालय ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। सुनवाई के दौरान आज न्यायालय ने कहा कि विनेश फोगाट ने अपने प्रदर्शन और उपलब्धियों से देश का नाम रोशन किया है। न्यायालय की इस टिप्पणी को मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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हालांकि न्यायालय ने चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए। अदालत ने ट्रायल की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने का आदेश दिया। साथ ही भारतीय खेल प्राधिकरण और भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा नामित स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की निगरानी में ट्रायल आयोजित करने को कहा गया, ताकि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में विनेश फोगाट की परिस्थितियों पर विस्तार से विचार किया था। न्यायालय के अनुसार, विनेश ने दिसंबर 2024 में अंतरराष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी को सूचित किया था कि गर्भावस्था के कारण वह कुछ समय के लिए प्रतिस्पर्धी खेलों से दूर रह रही हैं और बाद में वापसी करेंगी। जुलाई 2025 में बच्चे को जन्म देने के बाद उन्होंने फिर से प्रशिक्षण शुरू किया। इसके बाद एजेंसी ने उन्हें वर्ष 2026 से प्रतिस्पर्धा में भाग लेने की अनुमति प्रदान कर दी।

उच्च न्यायालय ने यह भी माना था कि गर्भावस्था के दौरान प्रतिस्पर्धाओं से दूर रहने के कारण विनेश उन अनिवार्य क्वालीफाइंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकीं, जिन्हें भारतीय कुश्ती महासंघ की चयन नीति के तहत आवश्यक माना गया था। इसी कारण उन्हें चयन ट्रायल से बाहर रखा गया था।

अदालत ने प्रथम दृष्टया यह भी पाया कि महासंघ की चयन नीति केवल कुछ विशेष प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं तक भागीदारी सीमित करती है। इससे विनेश फोगाट जैसे खिलाड़ियों के लिए अवसर बाधित हो रहे थे। न्यायालय ने संकेत दिया कि ऐसी व्यवस्था निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं प्रतीत होती।

सुनवाई के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा भी सामने आया। उच्च न्यायालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में पेरिस ओलंपिक वजन माप विवाद को लेकर की गई टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। न्यायालय ने इस प्रकरण को "राष्ट्रीय शर्म" बताए जाने वाली टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक बताया। अदालत का मानना था कि ये टिप्पणियां प्रतिशोध की भावना से प्रेरित प्रतीत होती हैं, विशेषकर तब जबकि खेल मध्यस्थता न्यायालय पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि इस मामले में विनेश फोगाट की ओर से कोई गलती नहीं पाई गई थी।

वहीं उच्चतम न्यायालय ने यह भी कहा कि उसे इस बात पर कुछ चिंता है कि उच्च न्यायालय ने मामले की जांच किस प्रकार की। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह कोई चिकित्सा महाविद्यालय में प्रवेश का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों से जुड़ा विषय है। अदालतों को इस प्रकार हस्तक्षेप कर पूरी चयन प्रक्रिया और कार्यक्रम को प्रभावित नहीं करना चाहिए।

फिलहाल उच्चतम न्यायालय ने विनेश फोगाट को भारतीय कुश्ती महासंघ की याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 जून को होगी। इस बीच सभी की निगाहें एशियाई खेलों के चयन ट्रायल पर टिकी रहेंगी, जहां विनेश फोगाट अपनी दावेदारी पेश करेंगी।

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