Vistara-Air India Deal: मर्जर पर CCI ने जारी किया नोटिस, पूछा जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

By अंकित जायसवाल | Jul 05, 2023

एयर इंडिया पूरी तरह टाटा संस के स्वामित्व वाली एयरलाइन है। यह देश की प्रमुख एयरलाइन है। टाटा संस ने 27 जनवरी 2022 को एयर इंडिया में 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी। वहीं, विस्तारा अभी टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस लिमिटेड का ज्वाइंट वेंचर है। इसकी स्थापना साल 2013 में हुई थी। यह मिडिल ईस्ट, एशिया और यूरोप में अंतरराष्ट्रीय परिचालन के साथ भारत की प्रमुख फुल-सर्विस एयरलाइन है। टाटा समूह की एयरएशिया इंडिया में भी 83.67 फीसदी हिस्सेदारी है। शेष 16.33 फीसदी हिस्सेदारी मलेशियाई समूह एयरएशिया के पास है। नवंबर में दोनों पक्षों ने एयरलाइनों का विलय करने की योजना की घोषणा की थी। विस्तारा में टाटा ग्रुप और सिंगापुर एयरलाइंस की 51.49 फीसदी हिस्सेदारी है। विलय सौदे के तहत, सिंगापुर एयरलाइंस ने 25.1 फीसदी हिस्सेदारी के लिए एयर इंडिया की शेयर पूंजी में 2,059 करोड़ रुपये निवेश करने का निर्णय लिया है। टाटा ग्रुप के पास शेष हिस्सेदारी बनी रहेगी। दोनों पक्षों को यह सौदा मार्च 2024 तक पूरा हो जाने की उम्मीद है।

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 इससे पहले, सीसीआई ने दोनों एयरलाइंस को नोटिस जारी कर कारण पूछा था कि विलय के प्रभाव की जांच क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए। प्रतिस्पर्धा कानून के अनुसार, सौदे के बारे में संभावित प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं के बारे में चिंता होने पर एंटीट्रस्ट निकाय के पास विलय या अधिग्रहण के लिए हरी झंडी देने से पहले पूरी तरह से जांच करने की शक्ति है। यदि यह सौदा सफल होता है, तो यह एयर इंडिया को देश की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय वाहक और दूसरी सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन बना देगा। एयर इंडिया, जिसे टाटा समूह ने पिछले साल अधिग्रहण किया था, अपने बेड़े, परिचालन प्रणालियों और राजस्व प्रबंधन को आधुनिक बनाना चाहता है। ऐसे किसी भी सौदे के लिए सीसीआई की मंजूरी विभिन्न चरणों से होकर गुजरती है। मंजूरी का पहला चरण 30 दिनों के भीतर दिया जाता है, जिसमें उसे लगता है कि विलय से प्रतिस्पर्धा कम होने की संभावना नहीं है। एक बार जब समीक्षा प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश कर जाती है, तो सीसीआई आगे की समीक्षा के लिए संबंधित हितधारक को एक नोटिस भेजता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ग्रुप के पास नोटिस का जवाब देने के लिए 30 दिन का समय है।

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