Yes Milord: ठीक से नहीं काटे बाल, इस पर SC ने क्या गजब का फैसला दिया

By अभिनय आकाश | Feb 14, 2026

अक्सर हम और आप देखते हैं कि जब भी कभी हम किसी सैलून में जाते हैं तो इस बात का ध्यान रखते हैं कि किस तरीके से वो व्यक्ति हमारे हेयर स्टाइल या तमाम और सारी चीजों को वो करता है। कौन-कौन से प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करता है। कहीं कोई ऐसी चीज तो नहीं है कि जो हमारी स्किन को या फिर तमाम तरीके से हमारे लुक को खराब तो नहीं कर देती है। इन सारी चीजों को लेके अमूमन हम देखते हैं कि चाहे महिलाएं हो चाहे पुरुष हो काफी गंभीर रहते हैं। लेकिन जिस तरीके से एक मामला सामने आया है वह मामला बेहद दिलचस्प है। मामला 7 साल पुराना है। लेकिन सबसे बड़ी बात यहां पर ये है कि क्या ऐसा भी मामला हो सकता है कि अगर कोई सैलूून में बाल काटने वाला व्यक्ति आपके बाल अच्छी तरह से नहीं काटता या आपके लुक को बिगाड़ देता है या फिर आपके बाल जिसने आपने काटने के लिए कहा है उससे ज्यादा बाल काट देता है तो उसे जुर्माने के तौर पर बड़ी रकम भी देनी पड़ सकती है। सुनकर आप चौंक जरूर रहे होंगे कि क्या ऐसा हो सकता है?

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क्या है यह मामला

अप्रैल 2018 में एक मॉडल दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में स्थित एक सैलून में गई थी। उनका आरोप था कि हेयर स्टाइलिस्ट ने उनके निर्देश से कहीं अधिक छोटे बाल काट दिए, जिससे उन्हें गंभीर मानसिक आघात हुआ और मॉडलिंग असाइनमेंट व करियर के आकर्षक अवसरों का नुकसान हुआ। एनसीडीआरसी ने शुरुआत में उन्हें 2 करोड़ का मुआवजा दिया था। पहले दौर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राशि के पुनर्मूल्यांकन का निर्देश दिया था। इसके बावजूद आयोग ने 2023 में पुनः 2 करोड़ का मुआवजा बरकरार रखा। इसके बाद होटल कंपनी ने दूसरे आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

मुआवजा घटाकर 25 लाख किया

सुप्रीम कोर्ट ने एक लग्जरी होटल के सैलून में 'गलत हेयरकट' के मामले में महिला को 2 करोड़ रुपये की मुआवजे राशि देने के उपभोक्ता अदालत के आदेश को घटाकर 25 लाख रुपये कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल की अगुवाई वाली बेंच ने 6 फरवरी को अपने फैसले में कहा कि हालांकि सेवा में कोताही साबित हुई है लेकिन उपभोक्ता विवादों मैं क्षतिपूर्ति ठोस साक्ष्य के आधार पर दी जानी चाहिए, न कि केवल मांग करने या शिकायतकर्ता की इच्छा और कल्पना के आधार पर। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि क्षतिपूर्ति केवल अनुमान या शिकायतकर्ता की मनमानी के आधार पर नहीं दी जा सकती। विशेषकर जब दावा करोड़ों रुपये का हो तो हर्जाने के लिए विश्वसनीय और भरोसेमंद साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक है। अदालत ने फैसले में कहा कि यह ऐसा मामला नहीं था, जिसमें राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग किसी छोटे मुद्दे पर विचार कर रहा हो और नियम (thumb rule) के आधार पर क्षतिपूर्ति तय कर दी जाए।

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क्या हैं इस फैसले के मायने ?

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली अपील पर सुनवाई के दौरान मामले को दोबारा नैशनल कंज्यूमर फोरम भेजा था ताकि महिला को मुआवजे की रकम के दावे के सबंध में साक्ष्य पेश करने का मौका मिले। एससी ने फोरम से कहा था कि वह पेश साक्ष्य और मटीरियल पर विचार के बाद नए सिरे से आदेश पारित करे। तब एससी ने कहा कि वह उक्त फाइव स्टार होटल के सैलून द्वारा सेवा में कोताही के सबंध में कज्यूमर फोरम के निष्कर्ष में दखल नहीं देना चाहता है। सुप्रीम कोर्ट ने मामला दोबारा कंज्यूमर फोरम को भेजा था। लेकिन दोबारा कंज्यूमर कोर्ट ने आदेश पारित कर दो करोड़ का मुआवजा राशि तय किया उसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने उसमें दखल दिया और राशि 25 लाख कर दी।

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