By अंकित सिंह | Apr 12, 2024
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद जबरदस्त तरीके से सिसायी संकट का दौर बरकरार है। अरविंद केजरीवाल फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। हालांकि अभी भी वह मुख्यमंत्री पद की कुर्सी पर बने हुए हैं। भाजपा लगातार अरविंद केजरीवाल से इस्तीफे की मांग कर रही है। वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी का दावा है कि अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री थे, हैं और आगे भी रहेंगे। ऐसे में दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना की एक चिट्ठी से आम आदमी पार्टी के टेंशन बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि एलजी ने गृह मंत्रालय को बताया है कि केजरीवाल के जेल जाने के बाद सरकार के कामकाज की चर्चा को लेकर बैठक बुलाई गई थी जिसमें मंत्रियों ने हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने बताया कि यह नेताओं की असंवेदनशीलता को दिखाता है।
आम आदमी पार्टी (आप) की नेता के आरोप पर भाजपा ने पलटवार किया है। दिल्ली इकाई के प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि ‘‘राष्ट्रपति शासन का डर’’ आम आदमी पार्टी को सता रहा है, जिसके पास विधानसभा में 62 विधायक हैं। उन्होंने कहा कि आतिशी का बयान अरविंद केजरीवाल के भ्रष्टाचार पर दिल्ली हाई कोर्ट की टिप्पणी पर उनके डर और हताशा का प्रतिबिंब है। अगर अरविंद केजरीवाल सोचते हैं कि वह जेल से सरकार चला सकते हैं, तो वह गलत हैं। उन्हें अपने विधायकों पर भरोसा नहीं है, इसलिए वह अपनी पत्नी को चेहरे के तौर पर आगे कर रहे हैं. अगर दिल्ली संवैधानिक संकट की ओर बढ़ रही है तो इसके लिए पूरी तरह से अरविंद केजरीवाल जिम्मेदार हैं। बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि सीएम अरविंद केजरीवाल सत्ता के नशे में इतने चूर हैं कि वह जेल से सरकार चलाने के लिए उत्सुक हैं... मैं पूछना चाहता हूं कि क्या AAP में नेतृत्व की कमी है? आपके (AAP) पास 60 से ज्यादा विधायक हैं, उनमें से कोई भी CM बनने लायक नहीं है?...आप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए आरोप, ये उनकी पुरानी आदत है।
दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है ऐसे में हमेशा यहां उपराज्यपाल की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में अगर मुख्यमंत्री जेल में बंद है और वह इस्तीफा नहीं देते हैं तो उपराज्यपाल संवैधानिक मशीनरी के टूटने का हवाला दे सकते हैं और धारा 239 एबी के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। वही धारा 239 एए को सरकार को बर्खास्त करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, कानून के मुताबिक जब तक केजरीवाल दोषी साबित नहीं हो जाते तब तक वह मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। ऐसे में दिल्ली को लेकर सारा का सारा फैसला अब उपराज्यपाल के हाथों में है। दूसरी ओर आम आदमी पार्टी सिंपैथी वोट के लिए इस तरीके का मुद्दा उछालने की कोशिश कर सकती है ताकि भाजपा को कटघरे में खड़ा किया जा सके।