जो भारत ने भी नहीं किया, वो तालिबान ने पाकिस्तान के साथ कर दिया, पूरे इस्लामाबाद में हड़कंप!

By अभिनय आकाश | Oct 29, 2025

आप किसी मक्कार और दुश्मन देश को डरा-धमका और मिटा तो सकते हैं लेकिन उस देश से उसी की गलती उगलवाना कई बार मुश्किल हो जाता है। भारत अगर करने पर आया तो वो पाकिस्तान को एक झटके में नक्शे से मिटाकर इतिहास की किताबों में डाल सकता है। लेकिन जाहिर सी बात है कि भारत पाकिस्तान से ये कैसे बुलवाए कि उसकी दूसरे देशों के साथ क्या सीक्रेट डील्स हैं? लेकिन तालिबान ने चिकनी और चालाकी भरी बातें कर पाकिस्तान से लिखित में यह काम करवा लिया है। इतिहास में पहली बार पाकिस्तान ने परेशान होकर बताया है कि एक विदेशी देश से उसकी क्या सीक्रेट डील हुई है। आपको बता दें कि ये डील भारत के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकती है। दरअसल पाकिस्तान तालीबान के हमलों से इतना परेशान हो गया है कि वो किसी भी कीमत पर सीज फायर चाहता है। पाकिस्तान इसलिए भी ज्यादा परेशान है क्योंकि इस्लाम के नाम पर आधी पाकिस्तानी जनता तालीबान का साथ देने के लिए तैयार है।

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अफगानिस्तान ने वार्ता के दौरान पाकिस्तान के सामने दो शर्तें रखी। पहली की पाकिस्तान किसी भी हालत में अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र या लैंड बॉर्डर का उल्लंघन नहीं करेगा। दरअसल, हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई इलाकों पर एयर स्ट्राइक की थी। जिसमें राजधानी काबुल भी शामिल था। दूसरी शर्ते थी कि पाकिस्तान अपने इलाके का इस्तेमाल अफगानिस्तान के दुश्मनों के लिए नहीं होने देगा। अफ़ग़ानिस्तान के विदेश मंत्रालय और पाकिस्तान के सेना एवं रक्षा मंत्री के प्रवक्ताओं ने टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया। दोनों पक्षों से अपेक्षा की जाती है कि वे आगे तनाव बढ़ने से रोकने के लिए गुप्त संपर्क जारी रखें। हालाँकि, ठोस प्रगति के बिना, सीमा पर झड़पें और कूटनीतिक तनाव जारी रहने की संभावना है, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता के प्रयास जटिल हो जाएँगे।

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न दोनों शर्तों ने पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ा दी। क्योंकि अब तालिबान ने उस पर वही आरोप मढ़ दिए हैं जो पाकिस्तान हमेशा दूसरों पर लगाता रहा है। तालिबान का ये रुख पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है। अपनी नाकामी को छुपाने के लिए पाकिस्तान अब तालिबान को जिद्दी बताने में जुट गया है। पाकिस्तानी मीडिया ने भी सरकार की लाइन पकड़ ली। जियो न्यूज ने रिपोर्ट दी कि वार्ता इसलिए फेल हुई क्योंकि तालिबान के तर्क अतार्किक और जमीनी हकीकत से अलग हैं। पाकिस्तान का दावा है कि उसने तालिबान को स्पष्ट और सबूत आधारित मांगे दी थी। लेकिन तालिबान ने सकारात्मक रुख नहीं दिखाया।  

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