By अभिनय आकाश | Jan 24, 2026
8000 पुलिसकर्मी, 3D मैपिंग, चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों की नजर, एआई निगरानी और नो फ्लाई जोन। यह 26 जनवरी से पहले राजधानी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था डिटेल्स नहीं है। यह सब मध्य प्रदेश के गुमनाम से जिले धार का नजारा है। केंद्र में है एक नया विवाद जिसका पैटर्न पुराना सा ही लगता है। यही कि धार की भोजशाला हिंदुओं की है या मुसलमानों की। जुम्मे के दिन पड़ी बसंत पंचमी के रोज यहां हिंदू पूजा करेंगे या मुस्लिम नमाज अदा करेंगे। देश की सबसे बड़ी अदालत ने संतुलन बनाने के प्रयास किए हैं। तमाम तरह की आशंकाओं के बीच 23 फरवरी को वसंत पंचमी पर मध्य प्रदेश के धार जिले में शांति से पूजा और नमाज दोनों हुए। भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर में हिंदू समुदाय के हजारों लोगों ने वाग्देवी (देवी सरस्वती) की पूजा-अर्चना की, वहीं परिसर के एक अन्य स्थान पर मुस्लिम समाज के लोगों ने नमाज भी अदा की। ऐसे में आइए जानते हैं कि धार की भोजशाला का इतिहास क्या है, सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले में पूजा वो नमाज के बीच क्या बैलेंस बनाया गया।
वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने के कारण दोनों समुदायों ने विवादित परिसर में पूजा-अर्चना और नमाज के लिए दावा किया था। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया और समय के बंटवारे का साफ फॉर्म्युला तय किया। कोर्ट ने विवादित परिसर में वसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने, जबकि मुसलमानों को दोपहर एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी।
शीर्ष अदालत हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वसंत पंचमी के दिन हिंदुओं को पूजा के लिए विशेष एकाधिकार अधिकार देने की मांग की गई थी। यह याचिका अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के माध्यम से दायर की गई थी। जैन ने दलील दी थी कि एएसआई का 2003 का आदेश उन परिस्थितियों को अड्रेस नहीं करता, जब वसंत पंचमी शुक्रवार की नमाज के साथ पड़ती है। उन्होंने वसंत पचमी पर पूरे दिन हिंदुओं को पूजा का विशेष अधिकार देने की मांग की।
मस्जिद समिति के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि नमाज दोपहर एक बजे से 3 बजे तक होती है। इसके बाद परिसर खाली किया जा सकता है। नमाज के लिए अनुमानित संख्या जिला मैजिस्ट्रेट को दी जाएगी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन कानून-व्यवस्था का पूरा ध्यान रखेगा। कोर्ट ने उस अपील को भी निपटा दिया, जिसमे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के भोजशाला परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण पर दिए गए आदेश को चुनौती दी गई थी।
भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ae) की ओर से संरक्षित 11वी शताब्दी का स्मारक है। हिंदू समुदाय इसे वाग्देवी (देवी सरस्वती) को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। 7 अप्रैल 2003 को एएसआई की एक व्यवस्था के तहत, हिंदू मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करते है और मुसलमान शुक्रवार को नमाज अदा करते हैं।
अधिकारियों ने बताया, हिंदू त्योहार और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ने के मद्देनजर किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए करीब 5,000 पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। सूर्योदय के साथ ही विवादित परिसर में हिंदू श्रद्धालुओं के जुटने का सिलसिला शुरू हो गया। स्थानीय संगठन 'भोज उत्सव समिति' के सदस्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वाग्देवी (सरस्वती) का चित्र स्थापित करके पूजा शुरू की।