बिंदी Ban, हिजाब Allowed, Lenskart के वायरल डॉक्यूमेंट पर क्या विवाद चल रहा है?

By अभिनय आकाश | Apr 17, 2026

अभी टाटा  कंसलटेंसी सर्विज यानी टीसीएस से जुड़ा विवाद पूरी तरह थमा भी नहीं था कि एक और बड़ी कंपनी को लेकर कंट्रोवर्सी सामने आने लगी है। इस बार मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि उस सवाल का है जो हम सबके वर्क प्लेस से सीधे जुड़ा है। मामला है ड्रेस कोड पॉलिसी का। क्या एक कंपनी यह तय कर सकती है कि आप अपनी रिलीजियस आइडेंटिटी कैसे दिखाएं? या अपनी रिलीजियस आइडेंटिटी को दिखाना जरूरी है भी? क्या ऑफिस में आपकी धार्मिक पहचान और उससे जुड़े पर्सनल बिलीफ आपकी अपनी चॉइस होगी या कंपनी की पॉलिसी उसे तय करेगी? तमाम विवाद चश्मे बनाने वाली पॉपुलर कंपनी लेंस कार्ड से जुड़ा है। क्या है लेंस कार्ड से जुड़ी कंट्रोवर्सी और क्यों हो रही है इसकी इतनी चर्चा?

लेंसकार्ट स्टाफ यूनिफार्म एंड ग्रूमिंग गाइड पर एक्स यूजर ने उठाए सवाल

शुरुआत एक एक्स पोस्ट से हुई। 15 अप्रैल को शेफाली वैद नाम की एक्स यूजर ने लेंस कार्ड को टैग करते हुए कुछ फोटो शेयर की। इन तस्वीरों को लेंस कार्ट स्टाफ यूनिफार्म एंड ग्रूमिंग गाइड का हिस्सा बताया जा रहा है। तस्वीर में दिखाए गए नियम के हिसाब से कंपनी की वर्कर्स एक पर्टिकुलर लेंथ का हिजाब पहन सकती हैं। लेकिन किसी भी कलर की बिंदी, स्टोन या फिर कलावा नहीं पहन सकती। सिंदूर को लेकर भी नियम बताया गया कि इसे मिनिमम लगाना है और इस तरह से लगाना है कि माथे पर नहीं आए। इस तरह के और भी कई सारे नियमों का जिक्र किया गया। इस फोटो को शेयर करते हुए यूजर ने लिखा मैं नियमों को कंफर्म कर रही हूं। पीयूष बंसल अपने वर्कर्स को यही बताते हैं कि हिजाब ओके है लेकिन बिंदी तिलक क्या कलावा ओके नहीं है। यह ऐसी कंपनी है जो हिंदू बहुल देश भारत में है। जिसके अधिकतर वर्कर्स और कस्टमर हिंदू हैं। आप इस पर क्या कहेंगे?

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डॉक्यूमेंट में क्या-क्या है?

वायरल डॉक्यूमेंट में कई तरह के ड्रेस कोड निर्देश दिए गए थे। इसमें कहा गया था कि अगर कोई कर्मचारी पगड़ी पहनता है तो उसका रंग काला होना चाहिए। इसी तरह हिजाब पहनने की अनुमति थी लेकिन उसके लिए भी काले रंग की शर्त रखी गई थी। साथ ही यह भी कहा गया था कि हिजाब का कवरेज सीमित हो। वहीं स्टोर में बुर्का पहनने की अनुमति नहीं दी गई थी। विज़िबल टैटू से बचने की सलाह दी गई थी ताकि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत ना हो। इसके अलावा मेहंदी लगाने पर भी रोक थी और अगर किसी खास मौके पर लगानी हो तो पहले से अनुमति लेनी होगी और वह भी सीमित समय के लिए। सबसे ज्यादा विवादित हिस्सा वो था जिसमें धार्मिक प्रतीकों को लेकर निर्देश दिए गए थे। जैसे कि तिलक, बिंदी या किसी भी तरह का धार्मिक स्टीकर पहनने की अनुमति नहीं थी।

हिंदू संस्कृति और परंपराओं को किया जा रहा टारगेट?

यह नियम लेंस कार्ट स्टाइल गाइड के पेज नंबर 11 में लिखा है। इस फोटो को शेयर करते हुए एक और यूजर ने लिखा, क्या सच में यह हिंदू बहुसंख्यक या सेकुलर देश है? हिंदुओं के साथ भेदभाव किया जाता है और अल्पसंख्यक मुसलमानों को वर्क प्लेस में अपनी धार्मिक पहचान का पालन करने की इजाजत दी जाती है। लेंस कार्ट यह रवैया हिंदू संस्कृति और परंपराओं को टारगेट कर रहा है। ऐसे ही और सारे कमेंट्स आए तो पीयूष बंसल ने जवाब भी दिया।

लेंसकार्ट के सीईओ ने क्या कहा

पीयूष ने लिखा कि हर साल नियमों में बदलाव होता है। हमारी कंपनी में अलग-अलग धर्म के हजारों लोग काम करते हैं। कोई डिस्क्रिमिनेशन नहीं होता। इसके आगे पीयूष ने जो लिखा हम शब्दशा बता देते हैं। पीयूष ने लिखा, मैंने देखा है कि लेंस कार्ड का गलत पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हो रहा है। मैं बताना चाहता हूं कि यह डॉक्यूमेंट हमारे वर्तमान दिशा निर्देशों को नहीं दिखाता। हमारी पॉलिसी में धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई रोक नहीं है। इसमें बिंदी और तिलक भी शामिल है। हम नियमित रूप से अपने दिशा निर्देशों को रिव्यू करते रहते हैं। हमारी ग्रूमिंग पॉलिसी समय के साथ विकसित हुई है और इसके पुराने नियम आज हमारी पहचान को सही ढंग से नहीं दिखाते हैं। आपको जो कंफ्यूजन हुआ उसके लिए हम माफी चाहते हैं। एक कंपनी के रूप में हम लगातार सीखते और आगे बढ़ते हैं। हमारी भाषा या नीतियों में खामियों को दूर किया गया है और आगे भी किया जाता रहेगा। भारत में हमारे हजारों कर्मचारी जो हमारे स्टोर्स में अपने धर्म और संस्कृति को गर्व से दिखाते हैं। यही लेंस कार्ड है। लेंस कार्ड भारत में बना था भारतीयों द्वारा और भारतीयों के लिए। हमारे लोगों की हर परंपरा हमारी कंपनी की पहचान का हिस्सा है। मैं कभी भी इसे खतरे में नहीं पड़ने दूंगा।

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डॉक्यूमेंट नया हो या पुराना इसे स्वीकारा क्यों गया?

यूजर ने पीयूष के जवाब पर क्रॉस क्वेश्चन किया। लिखा कि सॉरी, इस सफाई का कोई मतलब नहीं है। ये डॉक्यूमेंट फरवरी 2026 का है। अगर ये नियम आज की गाइडलाइन को नहीं दिखाते तो प्लीज नए वाले शेयर कर दीजिए। भले ही यह पुराना डॉक्यूमेंट हो तो उस समय भी इसे क्यों स्वीकार किया जाता था। हिजाब और पगड़ी की इजाजत थी लेकिन बिंदी, सिंदूर और कलावा की नहीं। इसके पीछे क्या लॉजिक था? अपने वकील से कहिए इस तरह का कमजोर स्पष्टीकरण तैयार करने के बजाय बेहतर तरीके से काम करें। इसके बाद इस खबर को रिकॉर्ड किए जाने तक पीयूष का कोई जवाब सामने नहीं आया।

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