जहां से हुआ था भारत पर कब्जा, ट्रेड रूट बंद करना था कारण, Strait of Hormuz की ये कहानी क्या आपको पता है?

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अभिनय आकाश । Apr 10 2026 1:40PM

वास्कोडिगामा की यात्रा ने पुर्तगाल की राजधानी लिसबन को एक आईडिया दिया। लिसबन को यह समझ आ गया कि अगर वह समुद्री रास्ते पर कंट्रोल कर ले तो बिचौलियों को काटकर सीधे मसालों का व्यापार किया जा सकता है। और इसके लिए उसे जमीन पर राज करने की जरूरत भी नहीं है। बस समुद्र के कुछ अहम ठिकानों पर कब्ज़ा चाहिए था।

ईरान अब स्टेट ऑफ हॉर्मोस के मैनेजमेंट को नए स्तर पर ले जाएगा। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामिनई की मौत के बाद देश में 40 दिनों का शोक था। 9 अप्रैल को 40 दिन पूरे हुए और इसी दिन नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का मैसेज टीवी पर ब्रॉडकास्ट हुआ। उन्होंने यह साफ किया है कि स्टेट ऑफ हॉर्मोस का मैनेजमेंट अब नई तरह से होगा और यह बदलाव खुद ईरान करेगा। मुस्तफा खामेनई के इस मैसेज से पहले भी ईरान इस बात का संकेत दे चुका है कि स्टेट ऑफ हॉर्मोस अब पहले जैसा नहीं होगा। नए स्टेटमेंट से यह और भी क्लियर हो चुका है कि ईरान अब कंट्रोल के साथ-साथ उसका मैनेजमेंट भी बहुत मजबूत करने वाला है। इसकी तैयारी में है। यह भी आशंका जताई जा रही है कि ईरान स्टेट ऑफ हॉर्मोस को लेकर और कड़े प्रतिबंध जारी कर सकता है। मोजतबा ने ईरान की जनता से एकजुट रहने और ऐसे मीडिया आउटलेट से दूर रहने की सलाह दी है जो अमेरिका या इजराइल को सपोर्ट करते दिखे। उन्होंने कहा, भले ही 40 दिनों का शोक पूरा हो गया है, लेकिन दुश्मन से बदला लेने का जज्बा खत्म नहीं होना चाहिए। ईरान जंग नहीं चाहता, लेकिन वह अपने अधिकारों को नहीं छोड़ेगा। ईरान अपने मरहूम सुप्रीम लीडर अली खामिनई और अपने शहीदों का बदला लेने के लिए पक्का इरादा रखता है। ईरान अभी भी अपने साउथ के पड़ोसियों से एक सही रिएक्शन का इंतजार कर रहा है ताकि वह अपना भाईचारा दिखा सके। 

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केप ऑफ गुड होप को पार करके भारत के तट पर पहुंचा जहाज

साल 1498 वास्कोडि गामा अपने जहाजों के साथ भारत के तट पर पहुंचे। कालीकट जो आज केरल में कोजीकोट है। यह पहली बार था कि कोई यूरोपियन समुद्री रास्ते से भारत पहुंचा था। अफ्रीका केप ऑफ गुड होप को पार करते हुए उस जमाने में भारत से आने वाले मसाले यूरोप में सोने जितने कीमती थे। काली मिर्च, लौंग, दालचीनी, जायफल यह सब चीजें भारत से अरब व्यापारियों के जरिए जमीनी रास्ते से पहले फारस की खाड़ी या लाल सागर तक जाती थी। फिर वहां से मिस्र और इटली के वेनिस शहर तक। वेनिस के व्यापारी इन मसालों को पूरे यूरोप में बेचते थे। इस पूरी सप्लाई चेन में अरब व्यापारी और वेनिस के सौदागर बिचोलिए थे और यह बिचोलिए इतना मुनाफा कमाते थे कि जब तक मसाले यूरोप पहुंचते उनकी कीमत कई गुना बढ़ चुकी होती थी। वास्कोडिगामा की यात्रा ने पुर्तगाल की राजधानी लिसबन को एक आईडिया दिया। लिसबन को यह समझ आ गया कि अगर वह समुद्री रास्ते पर कंट्रोल कर ले तो बिचौलियों को काटकर सीधे मसालों का व्यापार किया जा सकता है। और इसके लिए उसे जमीन पर राज करने की जरूरत भी नहीं है। बस समुद्र के कुछ अहम ठिकानों पर कब्ज़ा चाहिए था। 

तीनों जगह समुद्री रास्तों पर कंट्रोल

पुर्तगाल के राजा मैनुअल ने 1505 में एक प्लान बनाया और इस प्लान में तीन जगहें थी। पहला अदन जो लाल सागर के मुहाने पर है ताकि मिस्र और अलेक्जेंड्रिया जाने वाले व्यापार को रोका जा सके। दूसरा था होर्मुज जो फारस की खाड़ी के मुहाने पर है ताकि बैरूद और फारस जाने वाला रास्ता बंद हो और तीसरा मलक्का जो आज के मलेशिया में है ताकि चीन के साथ होने वाले व्यापार पर कंट्रोल हो सके। तीनों जगह समुद्री रास्तों के चोक पॉइंट थी। मतलब ऐसे तंग रास्ते जहां से होकर गुजरे बिना कोई जहाज आगे नहीं जा सकता। इन तीनों पर कब्जा करो तो हिंद महासागर का पूरा व्यापार तुम्हारे हाथ में। और इन तीनों में सबसे अहम था होर्मुज। होर्मुज एक छोटा सा टापू है फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच। आज यह ईरान का हिस्सा है। लेकिन उस जमाने में यह एक अलग छोटी सी सल्तनत थी जिसका अपना राजा था। यह राजा सफाविद ईरान के शाह इस्माइल को टैक्स देता था। हॉर्मूस उस वक्त दुनिया के सबसे अमीर व्यापारिक ठिकानों में से एक था और एक फारसी कहावत थी कि अगर दुनिया एक अंगूठी है तो होर्मुज उसमें जड़ा हीरा है और इसकी वजह भी थी कि यहां से बहुत सारी चीजें गुजरती थी। भारत से आने वाले मसाले, कपड़े, इंडोनेशिया से आने वाली लौंग और जायफल, फारस से जाने वाला रेशम, बहरीन से आने वाली मोती और सबसे जरूरी अरब और फारस से भारत जाने वाले युद्ध के घोड़े। यह घोड़े वाला हिस्सा बहुत अहम है क्योंकि इसका संबंध सीधे भारत से है। उस जमाने में भारत के दक्कन में कई सल्तनतें थी। बहमनी सल्तनत जो बाद में पांच छोटी सल्तनतों में बंट गई और विजयनगर साम्राज्य इन सबको लड़ाई के लिए अच्छी नस्ल के घोड़े चाहिए थे। भारत में जो देसी नस्ल के घोड़े मिलते थे, वह दक्कन की भीषण गर्मी में भारी भक्तबंद सिपाही को लेकर ज्यादा देर तक नहीं दौड़ सकते थे। अरबी और फारसी घोड़े इस काम के लिए कहीं बेहतर थे। तो भारत के राजा भारी कीमत देकर अरब और फारस से घोड़े मंगाते थे। पुर्तगाली व्यापारी नूनीस ने लिखा है कि 16वीं सदी के पहले हिस्से में विजयनगर का राजा हर साल होर्मुज के रास्ते से करीब 13,000 घोड़े इंपोर्ट करता था।

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पुर्तगालियों ने हॉर्मूज पर करीब 107 साल राज किया

पुर्तगालियों ने हॉर्मूज पर सीधा राज नहीं किया। लोकल राजा अपनी जगह बना रहा लेकिन असली कंट्रोल पुर्तगालियों के पास था। राजा को टैक्स देना होता था। शुरू में सालाना सोने के सिक्के दिए जाते थे। बाद में पुर्तगालियों ने पूरी कस्टम ड्यूटी ही अपने हाथ में ले ली और सबसे अहम चीज थी कार्तताज़ सिस्टम। कार्तताज़ एक तरह का लाइसेंस था या यूं कहें कि समुद्री पासपोर्ट। हिंद महासागर में कोई भी जहाज चलाना हो तो उसे पुर्तगालियों से यह कारतताज़ लेना पड़ता था। । पुर्तगालियों ने हॉर्मूस पर करीब 107 साल राज किया। लेकिन धीरे-धीरे उनकी पकड़ कमजोर होती गई। एक तरफ ऑटोमन साम्राज्य ने  में हॉर्मूस पर हमला किया। हालांकि वह हमला नाकाम रहा। दूसरी तरफ सफाविद ईरान के शाह अब्बास जो 1588 से 1629 तक सत्ता में रहे उन्होंने पुर्तगालियों से बहुत नाराजगी रखी। 1615 में बंदर आवास जो हॉर्मूस के सामने सामुद्रिक तट पर था वो भी ले लिया गया। लेकिन हॉर्मूस लेने के लिए शाह अब्बास को नेवी चाहिए थी और सफावेद ईरान के पास मजबूत नेवी नहीं थी। यही एंट्री होती है ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की। अंग्रेज उस वक्त फारस के रेशम के व्यापार में दिलचस्पी रखते थे।

भारत की सैन्य ताकत की सप्लाई लाइन

होर्मुज सिर्फ मसालों का रास्ता नहीं था। यह भारत की सैन्य ताकत की सप्लाई लाइन भी थी। जो भी हॉर्मोंस को कंट्रोल करेगा वो भारत जाने वाले घोड़ों को भी कंट्रोल कर सकता था। मसालों को भी, रेशम को भी और सोना चांदी के फ्लो को भी। पुर्तगालियों ने यह बात बहुत अच्छे से समझ ली थी और साल 1507 जुलाई का महीना आया। अफोंसो द अल्बुकरर्क नाम का एक पुर्तगाली जनरल छह जहाजों और 500 सिपाहियों के साथ हॉर्मूस की तरफ निकला। अल्बुकरर्क एक तजुर्बेकार फौजी था जिसने अपनी जिंदगी के 10 साल उत्तरी अफ्रीका में मुस्लिमों के खिलाफ लड़ते हुए बिताए थे। होर्मुज पहुंचने से पहले उसने ओमान के तट पर कई शहरों को लूटा। कुरयात, मस्कट, सुहार सब पर हमला किया। कुछ ने हार मान ली, कुछ ने लड़ाई की, लेकिन नतीजा एक ही रहा। सितंबर 1507 में अल्बुकरर्क हॉर्मूस पहुंचा। गोवा को लेकर अल्बूकर्क ने पुर्तगालियों का मुख्यालय बनाया जिसे अस्तादो द इंडिया कहा गया यानी पुर्तगाली भारत की राजधानी। 1511 में उसने मलक्का पर कब्जा किया जो दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक बंदरगाह था। 500 साल पहले पुर्तगालियों ने हॉर्मूस इसलिए लिया क्योंकि भारत का व्यापार यहीं से गुजरता था। आज भी भारत अपने तेल का बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी से इंपोर्ट करता है। हॉर्मोस बंद होने का मतलब है भारत की एनर्जी सप्लाई पर सीधा असर। 

होर्मुज पर ईरान का नया प्लान क्या है?

शुरुआत में तो यह जंग ईरान के लिए सर्वाइवल की लड़ाई थी। लेकिन अब ईरान इसे एक बड़े मौके की तरह देख रहा है। यही वजह है कि ईरान अब स्टेट ऑफ हॉर्मोस पर अपना दबदबा बढ़ाकर इसका फायदा उठाना चाहता है। इस हफ्ते पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत होने वाली है। लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी है। ईरान का मानना है कि पहले ही दिन इजराइल ने शर्तों को तोड़ दिया। अमेरिका अब यह कह रहा है कि ईरान यूरेनियम इनरचमेंट नहीं कर सकता। जबकि ईरान के प्रपोजल में ऐसा कुछ भी नहीं था। 10 अप्रैल को दोनों पक्ष पाकिस्तान में होंगे। परमानेंट सीज फायर और डील पर बात होगी। वाइट हाउस ने यह कंफर्म कर दिया है कि अमेरिका की तरफ से वाइस प्रेसिडेंट जेडी वंस मिडिल ईस्ट में अमेरिका के राजदूत स्टीवट कॉफ और ट्रंप के दामाद जेरिट कुशनर होंगे। ईरान की तरफ से संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कालबा का नाम सामने आ रहा है। इस मीटिंग को पाकिस्तान होस्ट कर रहा है। पाकिस्तान के मीडिएटर होने पर भी कई वजह गिनाई जा रही हैं। जैसे वो ईरान के साथ 900 कि.मी. सीमा शेयर करता है। ईरान के बाद दुनिया भर में सबसे ज्यादा शिया मुस्लिम जो है वो पाकिस्तान में रहते हैं। पाकिस्तान में अमेरिका का कोई मिलिट्री बेस नहीं है जो ईरान के लिए ट्रेडिबल स्पेस बताया जा रहा है। 

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