रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स योजना क्या है? इससे निर्यातकों को क्या लाभ मिलता है? सरकार ने इसे दोबारा शुरू क्यों की है?

By कमलेश पांडे | Jun 09, 2025

विदेश व्यापार में अभिरुचि लेने वाले निर्यातकों के लिए "रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (RoDTEP) योजना" एक ऐसी लाभकारी योजना है जो निर्यातित उत्पादों पर लगने वाले करों और शुल्कों को वापस करने के लिए अस्तित्व में लाई गई है। यह योजना केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों और शुल्कों को शामिल करती है जिन्हें अन्य योजनाओं के माध्यम से वापस नहीं किया जाता है। 

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दरअसल, यह योजना निर्यातकों को ड्यूटी, टैक्स और लेवी की भरपाई करती है, जिन्हें अन्य योजनाओं द्वारा कवर नहीं किया गया है। इसलिए इस योजना से निर्यातकों को सहूलियत मिलती है। जहां तक इस योजना में पात्रता का सवाल है तो इसका लाभ उठाने के लिए, निर्यातकों को अपने निर्यात दस्तावेज (जैसे कि शिपिंग बिल) में दावा करना होगा। 

क्या आपको पता है कि यह योजना कैसे काम करती है, यदि नहीं तो यह जान लीजिए कि निर्यातकों को "रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स योजना" के तहत दावा करने के लिए अपने शिपिंग बिल में घोषणा करनी होगी। इसके लिए विभिन्न दरें लागू हैं, जो विभिन्न उत्पादों और क्षेत्रों के लिए "रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स योजना" के तहत पूर्व से ही निर्धारित तय की गई हैं, जिनमें समय के साथ संशोधन किए जाने का भी प्रावधान है।

जहां तक इसके अनुपालन का सवाल है तो बता दें कि निर्यातकों को "रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स योजना" के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए कुछ अनुपालन आवश्यकताओं का पालन करना होगा। वहीं, रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (RoDTEP) योजना के तहत निम्नलिखित लाभ को उठाया जा सकता है:- 

पहला, निर्यातकों को वित्तीय सहायता: रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (RoDTEP) योजना के तहत, निर्यातकों को उन करों और शुल्कों की भरपाई की जाती है, जो उनके उत्पाद की लागत में शामिल होते हैं। मसलन, इस योजना के तहत, निर्यातकों को केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों और शुल्कों का रिफंड मिलता है जो उनके निर्यात किए गए उत्पादों पर लागू होते हैं। इससे निर्यातकों को आर्थिक मदद मिल जाती है और वो अंतरराष्ट्रीय बाजार की प्रतिस्पर्धा में मजबूती से टिके रहते हैं।

दूसरा, अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में मदद: रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स नामक योजना निर्यातकों को वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद करती है। इस प्रकार योजना निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करती है क्योंकि यह निर्यातकों को लागत में कमी और प्रतिस्पर्धी कीमतों के साथ लाभ प्रदान करती है।

तीसरा, व्यापार/व्यवसाय का विस्तार: रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स नामक योजना भारत के निर्यात व्यापार को बढ़ावा देती है। यह योजना निर्यातकों को उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद करती है क्योंकि वे अब करों और शुल्कों की चिंता किए बिना अपने उत्पादों को निर्यात कर सकते हैं.

चतुर्थ, टैक्सेज की रिफंड: रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (RoDTEP) नामक योजना के तहत, निर्यातकों को केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों और शुल्कों की रिफंड मिलती है, जिन्हें पहले अन्य योजनाओं के माध्यम से रिफंड नहीं किया जाता था।

पंचम, संशोधित लाभ: गत 1 जून 2025 से, विशेष आर्थिक जोन (SEZ), एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स (EOU) और एडवांस ऑथराइजेशन (AA) होल्डर्स के लिए रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (RoDTEP) नामक योजना का लाभ बहाल किया गया है।

षष्टम, पारदर्शिता और दक्षता: रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स नामक योजना एक व्यापक एंड-टू-एंड डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है, जो पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करती है।

सप्तम उत्पादकता में वृद्धि: रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स नामक योजना निर्यातकों को उनके द्वारा लगाए गए करों और शुल्कों का रिफंड प्राप्त करने में मदद करती है, जो उनकी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धी क्षमता को बढ़ाता है।

निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्ट प्रोडक्ट्स (RoDTEP) नामक योजना निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है जो उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करती है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बनाती है। चूंकि यह योजना भारत के निर्यात व्यापार को बढ़ावा देने और देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए मोदी सरकार ने पुनः इस योजना को लागू कर दिया, ताकि रोजगार सृजन में भी सहूलियत मिले।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

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