Gyan Ganga: जब प्रभु ने बालि को उसके प्रश्नों के जवाब दिए!

By सुखी भारती | Apr 22, 2021

बालि ने जब यह कहा कि प्रभु मैं बैरी और सुग्रीव आपका प्रिय क्यों? तो इस तथ्य को लेकर हम गहन से गहन विवेचना करें तो पाएंगे कि प्रभु का हृदय दया, ममता व स्नेह का ऐसा विशाल सागर है कि उनके दिव्य व्यक्तित्व को समझा ही नहीं जा सकता। मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी एक बात और कहते हैं ‘सोई सेवक प्रियतम मम सोई। मम अनुसासन मानै जोई।।’ अर्थात मुझे प्रिय भी वही है और मैं सेवक भी उसी को मानता हूँ, जो मेरे अनुशासन में रहता है। फिर अनुशासन की वास्तविक परिभाषा क्या है? अनुशासन तो नियम पर अडिगता की पैरवी करता है। जिसने नियम तोड़ा वह दंड का अधिकारी है, भले ही वह सगा हो अथवा पराया। लेकिन श्रीराम तो ऐसे किसी नियम के पक्षधर लगते ही नहीं। क्योंकि भक्तिमति शबरी श्रीराम जी के सम्मुख ही उन्हें जूठे बेर खिला रही है। जो कि निसन्देह प्रभु की पूजा पद्धति एवं सम्मान के पूर्णतः विपरीत है। लौकिक दृष्टिकोण से देखने से लगता है कि शबरी यहाँ दंड की पात्र है। लेकिन प्रभु तो यहाँ शबरी को दंड न देकर अपना परम धाम देते हैं। केवट भी प्रभु के साथ गंगा तट पर मिलन के दौरान अनेकों गलतियां करता प्रतीत होता है। जिसे देख श्री लक्षमण जी क्रोधित होकर अपने तरकश से बाण तक निकालने को तत्पर हो जाते हैं। लेकिन श्रीराम जी हैं कि किचिंत भी कोई उग्र प्रतिक्रिया नहीं करते अपितु मुस्कुराते रहते हैं व केवट को उद्दण्ड न कहकर परम सेवक व भक्त के सम्मान से संबोधित करते हैं। लौकिक दृष्टि से तो यहाँ केवट ने भी प्रभु के साथ आदर-सम्मान व रीति का कोई पालन नहीं किया। लेकिन तब भी केवट प्रभु का प्रिय है। 

इसे भी पढ़ें: Gyan Ganga: जब बालि मृत्यु शैया पर श्रीराम जी से धर्म-अधर्म की बातें करने लगा

बालि जब यह कहता है कि ‘अवगुन कवन नाथ मोहि मारा’ तो आश्चर्य है कि बालि को अभी तक अपना अवगुण तक दिखाई नहीं पड़ रहा? उसे लग रहा है कि मैंने तो जीवन में कोई अपराध किया ही नहीं। मेरा तो संपूर्ण जीवन ही निष्कलंक है। सज्जनों इसे ही माया कहा गया है, अज्ञानता का सर्वोच्च स्तर। सोचिए कि उस अपराधी के अपराध करने का मानसिक स्तर कहाँ तक पहुँच गया होगा कि उसे अपने द्वारा किए गए अपराध कोई अपराध ही प्रतीत  नहीं हो रहे। उसके लिए अपराध करना तो मानों सामानय व स्वाभाविक सी क्रिया है, जैसे स्नान कर लेना व भोजन कर लेना। बालि भी ठीक इसी श्रेणी का अपराधी है। देखिए तो कितना मासूम बनकर पूछ रहा है कि प्रभु आपने मुझे व्याध की तरह छुपकर बाण क्यों मारा। कम से कम मेरा अपराध तो बता दिया होता। प्रभु सोच रहे हैं कि वाह बालि हमें लेकर कैसा विचित्र विशलेषण है तुम्हारा। हमें प्रभु की संज्ञा भी दे रहे हो और हमारी तुलना व्याध से भी कर रहे हो। वैसे तुमने ठीक ही कहा, क्योंकि व्याध की तरह होना भी कौन सा सहज कार्य है? गहनता से देखा जाए तो इसमें भी एक सम्मान ही छुपा है। और यह सम्मान पाने की कला केवल दो लोगों में हैं। एक भक्त व दूसरे भगवान्। क्योंकि व्याध शिकार करते समय जमीन पर जैसे साष्टांग प्रणाम की मुद्रा में लेट जाता है, पूर्णतः झुककर नतमस्तक हो जाता है। वैसा तो केवल और केवल निहंकारी भक्त व भगवान ही कर सकते हैं। और जिसने साष्टांग प्रणाम ही कर दिया, वह भला श्रेष्ठ व बड़ा कहाँ रहा। बड़ा व सम्मानीय तो वही हुआ न जिसे प्रणाम किया जा रहा है। और तुम्हारे मन की अभिलाषा सदैव यही रही कि तुम्हें समस्त जगत बड़ा व सम्मानीय कहे। लो तुम्हें प्रणाम करके हमने तुम्हारी यह इच्छा भी पूर्ण कर दी। रही बात अवगुण की उसकी सूची वैसे तो बहुत वृहद है लेकिन इस सूची में एक अपराध ऐसा है जो अक्ष्मय है, क्षमा हो भी क्यों, क्योंकि क्षमा तो गलती की होती है अपराध की नहीं। हे बालि! तुम जो मुझे धर्म का उपदेश दे रहे हो इसका तात्पर्य है कि तुम्हें भी अवश्य ही धर्म की पूर्ण जानकारी होगी। लेकिन तब भी तुमने वह अधर्म किए कि जिनकी चर्चा करने में भी मुझे लज्जा व संकोच हो रहा है। मेरी बनाई सृष्टि में ऐसा अधर्म व अनर्थ करने वाले जीव इस धराधाम पर फल फूल रहे हैं। यह देख मैं चिंतातुर हूँ। लेकिन तब भी तुम्हारा मुख्य अपराध मैं कहने जा रहा हूँ। सुनो और विचार करो। श्रीराम जी बालि को उसका कौन सा अपराध बताने जा रहे हैं। जानने के लिए पढ़ते रहिए ज्ञान गंगा---क्रमशः---जय श्रीराम!

- सुखी भारती

प्रमुख खबरें

Europe का बड़ा फैसला, अब बिना Charger मिलेगा Laptop, ग्राहकों के बचेंगे हजारों रुपये

Barabanki-Bahraich Highway: 9000 पेड़ों पर अटकी Forest Clearance, NHAI और वन विभाग आमने-सामने

Ahmedabad में AI का सबसे बड़ा धोखा! Deepfake वीडियो से बिजनेसमैन के नाम पर लिया लाखों का Loan.

EPFO का Digital Revolution: अब e-Prapti Portal से Aadhaar के जरिए एक्टिव करें पुराना PF खाता.