हिंदुत्व पर खड़े हुए विवाद से किसको होगा फायदा तो किसकी डूबेगी नैया, जानें विस्तृत विश्लेषण

By अनुराग गुप्ता | Nov 13, 2021

देश की सियासत का केंद्र माना जाने वाला उत्तर प्रदेश एक बार फिर से चर्चा का विषय बना हुआ है। इस बार मुद्दा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद की अयोध्या पर लिखी गई नई किताब ने दे दिया और तो और भाजपा उसे भुनाने में भी लगी हुई है क्योंकि अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसमें उन्हें अच्छा खासा फायदा भी मिल सकता है। प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इन्हीं मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने सबसे पहले सलमान खुर्शीद की किताब से कांग्रेस को कितना नुकसान हो सकता है। इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सलमान खुर्शीद की ऐसी विवादित टिप्पणी कोई पहली दफा नहीं आई है। इससे पहले उन्होंने अपनी लिखी किताब में 1984 सिख विरोधी दंगे को लेकर भी आपत्तिजनक बातें लिखी थीं।

दरअसल, सलमान खुर्शीद द्वारा हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोकोहरम जैसे जिहादी इस्लामी संगठन से करने के बाद विवाद खड़ा हो गया। जिसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया। इतना नहीं सलमान खुर्शीद की नई किताब 'सनराइज ओवर अयोध्या' की लॉन्चिंग के वक्त मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम भी मौजूद रहे। जिन्होंने हिंदू धर्म के बारे में टिप्पणी करने से गुरेज नहीं खाया।

प्रियंका का संर्घष होगा धूमिल

प्रभासाक्षी के इस कार्यक्रम में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के संर्घष के विषय पर भी चर्चा हुई। दरअसल, प्रियंका लखीमपुर खीरी, हाथरस में जा-जाकर अपनत्व दिखाने का प्रयास कर रही थीं। महिलाओं के साथ तस्वीरें खिंचा रही थीं तो कभी इलेक्ट्रिक स्कूटी देने की बात कह रही थीं लेकिन सलमान खुर्शीद की किताब ने उनके संर्घषों को दबा दिया। हालांकि, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर जब सर्वेक्षण की बात आती है तो भाजपा और समाजवादी पार्टी ही दिखाई दे रही हैं। भाजपा की फिर से सरकार बन सकती है और समाजवादी पार्टी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है और पिछले कुछ महीनों से उनके कार्यकर्ता जमीन पर दिखाई भी दे रहे हैं। 

इसे भी पढ़ें: हिन्दुत्व वाले बयान को लेकर आपस में ही भिड़े खुर्शीद और आजाद, अल्वी के राक्षस वाले बोल पर मचा हंगामा

इसी बीच संपादक नीरज कुमार दुबे ने बताया कि चाहे भाजपा हो, सपा हो या फिर कोई और पार्टी सभी जनता की नब्ज पहचानती हैं। इसीलिए तो चुनाव के वक्त जमीनी मुद्दों से हटकर पाकिस्तान, हिंदुत्व ऐसे तमाम मुद्दों को छेड़ा जाता है लेकिन कांग्रेस ने हिंदुत्व का मुद्दा उठाकर खुद की पैर में कुल्हाड़ी मारने का काम किया है। क्योंकि हिंदुत्व की राजनीति भाजपा से अच्छी कोई और पार्टी नहीं कर सकती है और उनका वोटबैंक मजबूत भी होता है।

विकास के दावों की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश की स्थिति पहले से ज्यादा सुधरी है। हां, यह नहीं कहा जा सकता है कि पूर्णता: प्रदेश बेहतर हो गया है लेकिन अखिलेश सरकार की तुलना में स्थिति कई गुना ज्यादा बेहतर हुई है। चुनाव के वक्त तो राजनीतिक दल एक-दूसरे के संकल्प पत्रों को लेकर निशाना साधते हैं ही और गिनाते हैं कि हम क्या करेंगे ? या फिर सत्ता में बैठी पार्टी ने क्या कुछ नहीं किया ? 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी हिंदुत्व पर खड़े हुए विवाद को हवा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने तो स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व में फर्क है। उनकी इस टिप्पणी पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कांग्रेस नेतृत्व पर हिंदू मत के खिलाफ घृणा को पोषित करने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस की विचारधारा जीवंत है और वह भाजपा-आरएसएस की विचारधारा का मुकाबला करेगी। उन्होंने संगठन के भीतर अपनी पार्टी के विचारों को मजबूत करने और उनका पूरे देश में प्रसार करने पर जोर दिया।

- अनुराग गुप्ता

प्रमुख खबरें

फुटबॉल का विवाद सियासत में पहुंचा, New York Mayor बोले- रेफरी के गलत फैसले से हारा Egypt

Chess की दुनिया में 17 साल के अश्वत का कमाल, फाइनल जीतकर बने भारत के 98वें ग्रैंडमास्टर

AI Talent का Superpower बना भारत, CEA नागेश्वरन बोले- दुनिया में अब हम दूसरे नंबर पर

Truecaller CEO का TRAI पर बड़ा हमला, कहा- नए Rules की वजह से देश में बढ़ रहा है Online Fraud।