By अंकित सिंह | Apr 21, 2022
देश में सिख गुरु तेग बहादुर के 400वें प्रकाश पर्व को उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। प्रधानमंत्री मोदी आजाद भारत के इकलौते ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने सूर्यास्त के बाद लाल किले से संबोधन दिया है। भारत के प्रधानमंत्री 15 अगस्त यानी कि स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हैं। लेकिन यह पहला मौका है जब प्रकाश पर्व के अवसर पर भारत का कोई प्रधानमंत्री लाल किला से देश को संबोधित कर रहा है। लेकिन सवाल यही है कि आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के लिए लाल किला को ही क्यों चुना?
11 मार्च 1783 को सिखों ने इस लाल किले को मुगलों से आजाद भी करवा लिया। इसका श्रेय सरदार बघेल सिंह धालीवाल को जाता है। यही कारण है कि लाल किले से सीखो की भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं। यह लाल किला बहादुर शाह जफर के जलवे के लिए भी याद किया जाता है। 15 अगस्त 1947 में जब देश आजाद हुआ तो भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसी लाल किले पर पहली बार ध्वजारोहण किया था तथा जनता को संबोधित किया था। इसके बाद से इसी लाल किले से भारत का हर प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हुए राष्ट्र को नई दिशा देने की कोशिश की है। इसी लाल किले से हर साल 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में आने वाली योजनाओं के बारे में बताते हैं।
15 अगस्त को इसी लाल किले से प्रधानमंत्री भारत की आन बान शान तिरंगा को फहराते है। लाल किले को मुगल राजा शाहजहां ने बनवाया था। इसका निर्माण 1638 में शुरू हुआ था जो कि 1648 तक चला था। उस दौरान लाल किले को बनवाने में करीब एक करोड़ रुपए खर्च हुए थे। लाल किले को लाल बालू से बनवाया गया है। इसमें दो प्रवेश द्वार है-एक लाहौर गेट, दूसरा दिल्ली गेट। लाल किला दिल्ली के यमुना नदी के किनारे बना हुआ है।