एकादशी के दिन क्यों नहीं खाए जाते हैं चावल? जानिए इसके पीछे की असल वजह

By प्रिया मिश्रा | Feb 08, 2022

हिन्दू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत को सर्वश्रेठ माना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार एक वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा-आराधना की जाती है और व्रत किया जाता है। एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और व्रत करने वालों पर उनकी विशेष कृपा बनी रहती है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन और व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। शास्त्रों के नियमानुसार एकादशी के दिन चावल खाना भी वर्जित माना गया है। एकादशी के दिन चावल ना खाने से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं।

 धार्मिक कथाओं के अनुसार जो लोग एकादशी के दिन चावल उन्हें अगले जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म मिलता है। ऐसा भी माना जाता है कि एकादशी के दिन चावल खाना अखाद्य पदार्थ खाने के बराबर माना जाता है जिससे मनुष्य को बुरा फल मिलता है। पौराणिक कथाों के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया था। उनके अंश पृथ्वी में समा गए और बाद में उसी स्थान पर चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए। इस कारण चावल और जौ को जीव माना जाता है। कथा के अनुसार जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया था, उस दिन एकादशी तिथि थी। इसलिए एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया। ऐसा माना जाता है कि एकादशी के दिन चावल खाना महर्षि मेधा के मांस और रक्त का सेवन करने के बराबर है।

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मन विचलित और चंचल होता है

 इसके अलावा एकादशी के दिन चावल को वर्जित मानने के पीछे एक और कारण है। माना जाता है कि चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है और जल पर चंद्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है इससे मन विचलित और चंचल होता है जिससे व्रत पूरा करने में बाधा आती है। इसलिए एकादशी के दिन चावल और जौ से बनी चीजें खाना वर्जित माना गया है।

शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन सात्विकता का पालन करना चाहिए अर्थात इस दिन लहसुन, प्याज, मांस, मछली, अंडा नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा झूठ, चोरी, ठगी जैसे बुरे कर्मों से बचना चाहिए और भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए।

- प्रिया मिश्रा

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