By निधि अविनाश | Apr 23, 2021
कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण भारत अव्यवस्था में है। इस समय देश में लगभग 3 लाख मामलें सामने आ गए है। मामले इतनी तेजी से बढ़ रहे है कि अस्पताल तक में मरीजों की भीड़ बन गई है। भीड़भाड़ के साथ-साथ देश भर के कई अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की भारी कमी है। जहां लोग अब ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए अपनी तरफ से इस लड़ाई को लड़ने के लिए मजबूर हैं, तो वहीं सवाल यह उठता है कि इस कमी के लिए कौन जिम्मेदार है?
लोग इस ऑक्सीजन की मांग को पूरा नहीं कर पाने के लिए सरकार को कोस रहे हैं। लेकिन हमारा ऑक्सीजन उत्पादन वर्तमान में 7,000 मीट्रिक टन है, जो दैनिक ऑक्सीजन की आवश्यकता से काफी अधिक है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने उल्लेख किया है कि मेडिकल ऑक्सीजन की बढ़ती मांग COVID-19 की दूसरी लहर के दौरान सांस की तकलीफ के कारण है। इस कमी का एक और कारण आपूर्ति और लॉजिस्टिक चेन के माध्यम से असमान वितरण है।
इस स्थिति से निपटने के लिए, सरकार ने ज्यादातर उद्योगों को ऑक्सीजन की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है, जो उत्पादन के लिए भट्टियों का उपयोग करते हैं। यह 22 अप्रैल से लागू होगा। इसके अलावा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ। हर्षवर्धन ने यह भी बताया कि केंद्र ने 15419 मीट्रिक टन की क्षमता के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर 162 Pressure Swing Adsorption (पीएसए) ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना को मंजूरी दी है। इनमें से, 33 पहले से ही बिहार, कर्नाटक और तेलंगाना में स्थापित किए जा चुके हैं; और आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी, पंजाब और उत्तर प्रदेश में एक-एक स्थापित किया गया है।आपको बता दें कि भारतीय रेलवे ने देश भर में ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाने वाले ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से हरे रंग के माध्यम से ’ऑक्सीजन एक्सप्रेस’ शुरू करने की भी घोषणा की।