ईरान को जमीन पर हराना क्यों नामुमकिन, क्या है नेतन्याहू का प्लान?

By अभिनय आकाश | Mar 03, 2026

ईरान के नक्शे को देखिए। चारों तरफ सीमाएं। कुल सात पड़ोसी देश इसके साथ अपनी सीमा को साझा करते हैं। इराक, तुर्की, अज़बजान, अर्मेनिया, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान। अब बात करते हैं समुद्री सीमाओं की। यह भी अलग है क्योंकि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी से ईरान जुड़ा हुआ है। अब इसका आकार समझिए। करीब 16.5 लाख वर्ग किमी इसका क्षेत्रफल है और यह इतना बड़ा है कि इसमें दो फ्रांस समाज है। आबादी लगभग 8.5 से 9 करोड़ लोग और इतिहास आज का ईरान उस प्राचीन फारसी साम्राज्य का उत्तराधिकारी है जिसकी जड़े लगभग 2500 साल पहले तक जाती है। अब सोचिए इतना विशाल भूभाग, इतनी बड़ी आबादी, इतना पुराना सभ्यता ढांचा क्या ऐसे देश को सिर्फ हवा से की गई स्ट्राइक से हराया जा सकता है? इतिहास कहता है नहीं। चाहे फर्स्ट वर्ल्ड वॉर हो या फिर सेकंड वर्ल्ड वॉर। कोई भी जंग सिर्फ आसमान से नहीं जीती गई है। 

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मतलब ईरान सिर्फ एक देश नहीं बल्कि ऊर्जा और भू रणनीति का केंद्र है। इसलिए उसे अक्सर मिडिल ईस्ट का किला कहा जाता है। दूसरा ईरान अकेला कभी नहीं लड़ता। अगर जंग जमीन पर उतरी तो यह सिर्फ दो देशों की लड़ाई नहीं होगी। ईरान के प्रभाव वाले नेटवर्क में शामिल है। हिजबुल्लाह और हमाज़ इराक और सीरिया की शियाई मिलीिया यानी जंग बहुस्तरीय और क्षेत्रीय बन सकती है। तेल मार्ग बंद हो सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। तीसरा सैन्य संरचना संख्या बनाम तकनीक। 

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 ईरान के पास लगभग 6 लाख से अधिक सक्रिय सैनिक हैं और सबसे प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं आईआरजीसी यानी कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स। यह कोई पारंपरिक सेना नहीं है बल्कि यह असमित और लंबी जंग की मशीन है। दूसरी ओर इजराइल के पास लगभग 1.7 लाख सक्रिय सैनिक हैं और 4 लाख रिजर्व है। संख्या में ईरान आगे है। तकनीक में इजराइल को बढ़त है। वायु शक्ति की बात करें तो अंतर यहां पर साफ है। इजराइल के पास में F35 स्टेल्स जेट्स हैं। आयरन डोम है, डेविड स्लिंग है, एरो जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। ईरान की वायु सेना पुरानी मानी जाती है। लेकिन उसने अपनी रणनीति बदली है।

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