Monsoon Delay 2026 | केरल में मॉनसून आने में क्यों हुई देरी? जानिए बंगाल की खाड़ी के चक्रवात का पूरा गणित

By रेनू तिवारी | May 27, 2026

तपती और झुलसा देने वाली गर्मी से परेशान देशवासियों के लिए एक मायूस करने वाली खबर है। भारत का दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून (South-West Monsoon), जिसके इस साल तय समय से पहले यानी 26 मई 2026 को केरल पहुंचने का अनुमान था, अब कछुए की चाल चल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने पूर्वानुमान को अपडेट करते हुए कहा है कि अब केरल में मॉनसून की पहली फुहार 2 से 4 जून के बीच पहुंच सकती है। भीषण हीटवेव (Heatwave) का सामना कर रहे भारत के लिए यह इंतजार अब और लंबा हो गया है।

भारत जैसे कृषि-प्रधान देश के लिए मॉनसून केवल एक मौसम नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

सालाना बारिश का हिस्सा: देश में होने वाली कुल सालाना बारिश का लगभग तीन-चौथाई (75%) हिस्सा अकेले मॉनसून से ही आता है।

रोजगार का संकट: भारत की लगभग आधी वर्कफोर्स (कामगार) सीधे तौर पर कृषि क्षेत्र से जुड़ी है, जिसके लिए यह बारिश जीवनरेखा के समान है।

चक्रवात ने कैसे बिगाड़ा मॉनसून का खेल?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मॉनसून की राह में रोड़ा अटकाने की मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में उठने वाला एक चक्रवाती सिस्टम (Cyclonic System) है।

दरअसल, बंगाल की खाड़ी से ही मॉनसून की एक प्रमुख शाखा उठती है और पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पश्चिम की ओर आगे बढ़ती है। लेकिन जब इस क्षेत्र में कोई चक्रवात सक्रिय होता है, तो वह आसपास की नमी और हवाओं को अपनी ओर खींच लेता है। इसके चलते:

हवा का बहाव टूटना: मॉनसून को उत्तर की ओर धकेलने वाले बड़े पैमाने के हवा के पैटर्न में रुकावट आती है।

री-ऑर्गनाइज होने में समय: चक्रवाती गतिविधियों के कारण मॉनसून का प्रवाह कमजोर पड़ जाता है, जिससे हवाओं को फिर से व्यवस्थित होने और अपने सही रास्ते पर लौटने में अधिक समय लगता है।

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भारत के लिए यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले साल 2013 और 2021 में भी चक्रवातों ने मॉनसून की रफ्तार को रोका था। लेकिन इस साल का समय सबसे खराब रहा, क्योंकि इस बार मॉनसून के जल्दी आने की उम्मीद थी।

केरल में हो रही बारिश 'असली मॉनसून' क्यों नहीं?

केरल के कई हिस्सों में इस समय जोरदार बारिश हो रही है, लेकिन मौसम विभाग इसे अभी मॉनसून नहीं मान रहा है। तकनीकी भाषा में इसे 'प्री-मॉनसून' (Pre-Monsoon) बारिश कहा जाता है।

IMD किसी भी मॉनसून के आगमन (Onset) की आधिकारिक घोषणा तभी करता है, जब कुछ कड़े वैज्ञानिक मापदंड एक साथ पूरे होते हैं:

बारिश का दायरा: केरल और लक्षद्वीप के 14 तय मौसम केंद्रों में से कम से कम 60% केंद्रों पर लगातार दो दिनों तक 2.5 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश दर्ज होनी चाहिए।

हवा की गति: पश्चिमी हवाओं की गहराई और गति एक निश्चित ऊंचाई (लगभग 600 hPa) तक मजबूत होनी चाहिए।

बादलों की स्थिति: क्षेत्र में बादलों के छाने की सघनता (Outgoing Longwave Radiation - OLR) मानक के अनुरूप होनी चाहिए।

अल नीनो का साया: 2026 में और बढ़ेगी चिंता

साल 2026 पहले ही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के कारण सामान्य नहीं रहा है। पश्चिमी, उत्तरी और मध्य भारत के हिस्से अभी भी लू के थपेड़ों से झुलस रहे हैं।

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हालात को और अधिक चिंताजनक बनाने वाली बात यह है कि IMD ने इस साल 'अल नीनो' (El Niño) के संभावित असर की आशंका जताई है। इसके कारण इस सीजन में देश के कई हिस्सों में कुल वर्षा सामान्य से कम होने का अनुमान है। ऐसे में मॉनसून भले ही जून के पहले हफ्ते तक दस्तक दे दे, लेकिन यह देखना अहम होगा कि यह देश के प्यासे और तपते हुए मैदानी इलाकों को कितनी राहत पहुंचा पाता है।

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