By एकता | May 04, 2026
आज के समय में रिश्तों के मायने तेजी से बदल रहे हैं। हाल के शोध और आंकड़े यह साफ इशारा कर रहे हैं कि शादी अब जीवन का कोई अनिवार्य हिस्सा नहीं रह गई है। ब्रिटेन से लेकर भारत तक, युवा अब शादी के बंधन में बंधने के बजाय अपनी आजादी और करियर को अधिक महत्व दे रहे हैं। मिलेनियल्स और जेन-जी के बाद अब जेन-अल्फा भी इसी राह पर चलते दिख रहे हैं, जिनके लिए शादी एक जरूरत नहीं बल्कि केवल एक विकल्प बनकर रह गई है।
शादी से दूरी बनाने में महिलाएं सबसे आगे दिख रही हैं। 2011 से 2019 के बीच ऐसी महिलाओं की संख्या में लगभग 48% की बढ़ोतरी हुई है जो शादी नहीं करना चाहतीं। शिक्षा और आर्थिक आजादी ने महिलाओं को यह ताकत दी है कि वे बिना समझौतों वाली जिंदगी जिएं। अब वे केवल उन्हीं रिश्तों को चुनना पसंद करती हैं जहाँ उन्हें बराबरी का सम्मान मिले।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, अविवाहित युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। साल 2011 में जहां 17% युवा कुंवारे थे, वहीं 2019 तक यह आंकड़ा बढ़कर 23% हो गया। न केवल अविवाहित रहने वालों की संख्या बढ़ी है, बल्कि शादी की औसत उम्र भी खिसक गई है। अब लोग 27 के बजाय 29 साल की उम्र के आसपास जीवनसाथी की तलाश शुरू करते हैं। डेटिंग एप्स के सर्वे भी यही बताते हैं कि बड़ी संख्या में युवा अब विवाह को कोई मजबूरी नहीं मानते।
आज के युवा परिवार या बच्चों की जिम्मेदारियों में बंधने के बजाय अपने करियर और आर्थिक स्थिति को मजबूत करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। समाज और रिश्तेदारों का दबाव अब बेअसर होता जा रहा है। पुराने समय में माना जाता था कि बच्चे बुढ़ापे का सहारा बनेंगे, लेकिन आज के दौर में करियर की वजह से बच्चे दूर रहते हैं और ओल्ड एज होम जैसी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं। यही वजह है कि युवा अपने 20 और 30 के दशक को केवल खुद को बेहतर बनाने में लगाना चाहते हैं।